2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य
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2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा लक्ष्य, निजी क्षेत्र की भागीदारी से तेज होगी स्वच्छ ऊर्जा की रफ्तार
निर्माणाधीन 17 परमाणु रिएक्टर पूरे होने पर 2031-32 तक क्षमता बढ़कर होगी लगभग 22 गीगावाट
Delhi/ भारत ने स्वच्छ और सतत ऊर्जा भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए वर्ष 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल करने का लक्ष्य तय किया है। इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए सरकार ने “परमाणु ऊर्जा मिशन” की घोषणा की है, जिसके तहत निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा दिया जाएगा और स्वदेशी तकनीक पर विशेष फोकस रहेगा। यह जानकारी राज्यसभा में केंद्रीय राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लिखित उत्तर में दी।
सरकार ने परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निजी निवेश को सक्षम बनाने के लिए शांति अधिनियम को लागू किया है, जिससे सार्वजनिक निजी भागीदारी का रास्ता खुला है। इस मिशन के तहत वर्ष 2033 तक पांच स्वदेशी लघु मॉड्यूलर रिएक्टर (SMR) विकसित और स्थापित किए जाएंगे। इन रिएक्टरों के डिजाइन, विकास और स्थापना का कार्य भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) द्वारा शुरू कर दिया गया है।
प्रस्तावित एसएमआर में 220 मेगावाट भारत लघु मॉड्यूलर रिएक्टर, 55 मेगावाट लघु मॉड्यूलर रिएक्टर और 5 मेगावाट तक के उच्च तापमान गैस-कूल्ड रिएक्टर शामिल हैं। ये रिएक्टर ऊर्जा-गहन उद्योगों के लिए कैप्टिव पावर प्लांट, पुराने जीवाश्म ईंधन आधारित संयंत्रों के पुन: उपयोग और दूरदराज क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयुक्त होंगे।
सरकार ने एसएमआर के अनुसंधान एवं विकास के लिए वर्ष 2033 तक विशेष वित्तीय प्रावधान भी किए हैं। वर्तमान में देश में 17 परमाणु रिएक्टर निर्माणाधीन हैं, जिनकी कुल क्षमता 13,600 मेगावाट है। इनमें प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) भी शामिल है।
इन परियोजनाओं के 2031-32 तक चरणबद्ध रूप से पूरा होने के बाद देश की परमाणु ऊर्जा क्षमता लगभग 22 गीगावाट तक पहुंचने की उम्मीद है। सरकार ने दीर्घकालिक दृष्टि के तहत 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन की व्यापक रूपरेखा तैयार की है, जिससे ऊर्जा सुरक्षा, कार्बन उत्सर्जन में कमी और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूती मिलेगी।