दिल्ली के कचरे के पहाड़ की जगह बनेगा आधुनिक ISBT टर्मिनल, बड़े बदलाव की शुरुआत
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गाज़ीपुर कचरा पहाड़ हटाकर आधुनिक ISBT बनाने की तैयारी, दिल्ली सरकार ने परिवहन व स्वच्छता सुधार को लेकर बड़ा निर्णय लिया।
नए ISBT में इलेक्ट्रिक बस चार्जिंग, डिजिटल टिकटिंग, ग्रीन कॉरिडोर और उन्नत यात्री सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना तैयार।
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार परियोजना सफल होने पर वायु प्रदूषण कम होगा और आसपास की आबादी को लंबे समय से मिल रही परेशानी खत्म होगी।
Delhi / दिल्ली के बढ़ते कचरा संकट और लंबी अवधि से विवादों में घिरे गाज़ीपुर लैंडफिल को लेकर अब एक बड़ा फैसला लिया गया है। दिल्ली सरकार और शहरी विकास विभाग ने मिलकर यह योजना तैयार की है कि आने वाले वर्षों में इस कचरे के पहाड़ की जगह एक आधुनिक ISBT (Inter State Bus Terminal) विकसित किया जाएगा। यह परियोजना न केवल राजधानी की छवि को बदलने वाली है, बल्कि दिल्ली के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क को भी नए आयाम देगी।
जानकारी के अनुसार, गाज़ीपुर लैंडफिल को चरणबद्ध तरीके से हटाया जाएगा और वहां बनने वाला नया ISBT अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस होगा। अनुमान है कि यह टर्मिनल लगभग 30 एकड़ में फैलेगा और इसमें 24×7 संचालन, इलेक्ट्रिक बसों के लिए चार्जिंग स्टेशन, स्वचालित टिकटिंग सिस्टम, फूड कोर्ट, यात्रियों के लिए डिजिटल लाउंज और ग्रीन कॉरिडोर जैसी आधुनिक सेवाएं शामिल होंगी।
अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते कचरे की समस्या और आग लगने की घटनाओं के कारण यह निर्णय आवश्यक हो गया था। दिल्ली नगर निगम ने पिछले कुछ वर्षों में कचरा कम करने के लिए कई तकनीकी प्रयास किए, लेकिन लैंडफिल का आकार लगातार बढ़ता गया। विशेषज्ञों का मानना है कि इस बड़े बदलाव से दिल्ली की वायु गुणवत्ता में सुधार होगा और आसपास के इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को राहत मिलेगी।
स्थानीय लोगों ने इस परियोजना का स्वागत किया है और इसे "ऐतिहासिक कदम" बताया है। हालांकि, कुछ पर्यावरण विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि परियोजना तभी सफल होगी जब कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन पर कड़ाई से अमल हो। सरकार ने आश्वासन दिया है कि लैंडफिल हटाने के साथ-साथ भविष्य के कचरा प्रबंधन के लिए आधुनिक ट्रीटमेंट प्लांट भी लगाया जाएगा।
यह परियोजना अगले 4–5 वर्षों में पूरी होने की उम्मीद है। अगर यह तय समय पर पूरी होती है, तो दिल्ली दुनिया के उन चुनिंदा शहरों में शामिल हो जाएगी जहां कचरे के पहाड़ की जगह अत्याधुनिक इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाया गया।