सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026 में निर्यात विस्तार और विकास पर जोर
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नई दिल्ली में सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026 आयोजित, समुद्री खाद्य निर्यात बढ़ाने और वैश्विक बाजार विस्तार पर विस्तृत चर्चा हुई।
बैठक में 40 देशों से व्यापार अवसर, कोल्ड चेन सुधार, मूल्य संवर्धन और निर्यात लॉजिस्टिक्स विकास पर सहमति बनी।
New Delhi/ नई दिल्ली स्थित अंबेडकर भवन में मत्स्य पालन विभाग द्वारा “सीफूड एक्सपोर्टर्स मीट 2026” का आयोजन किया गया, जिसमें भारत के समुद्री खाद्य निर्यात क्षेत्र को मजबूत बनाने पर विस्तृत चर्चा हुई। इस बैठक में केंद्रीय मंत्री Rajiv Ranjan Singh मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके साथ राज्य मंत्री S. P. Singh Baghel और George Kurian भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद को मजबूत करना और समुद्री खाद्य निर्यात से जुड़े मुद्दों पर समाधान निकालना था। बैठक में निर्यातकों ने बाजार तक पहुंच, मूल्य दबाव, अनुपालन लागत और लॉजिस्टिक्स जैसी चुनौतियों को सामने रखा।
केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ने समुद्री खाद्य निर्यातकों के प्रयासों की सराहना की और कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारत का समुद्री निर्यात लगातार मजबूत हुआ है। उन्होंने बताया कि अमेरिका के अलावा अन्य बाजारों में भारत का प्रदर्शन बेहतर रहा है, जिससे निर्यात में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने बाजार और उत्पाद विविधीकरण की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि कड़े नियामकीय अनुपालन, एंटीबायोटिक नियंत्रण और ट्रेसबिलिटी प्रणाली को मजबूत करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) के तहत एक्सेस पास प्रणाली और सहकारी समितियों की भूमिका को समावेशी विकास का आधार बताया।
केंद्रीय मंत्री ने अंडमान-निकोबार द्वीप समूह और खुले समुद्र में टूना जैसी उच्च मूल्य वाली प्रजातियों के निर्यात की संभावनाओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने बेहतर कोल्ड चेन, आधुनिक पैकेजिंग, मूल्य संवर्धन और पोस्ट-हार्वेस्ट लॉस को कम करने पर जोर दिया।
उन्होंने निर्यातकों से ₹1 लाख करोड़ के निर्यात लक्ष्य की दिशा में कार्य करने का आग्रह किया और ओपन मार्केट दृष्टिकोण अपनाने की सलाह दी। साथ ही उन्होंने आश्वासन दिया कि ईआईसी, एनसीडीसी, नाबार्ड और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय जैसी संस्थाएं पूरा सहयोग प्रदान करेंगी।
राज्य मंत्री George Kurian ने कहा कि मत्स्य क्षेत्र को उच्च मूल्य और उच्च मांग वाले सेक्टर के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि निर्यात वृद्धि के लिए मजबूत लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता नियंत्रण और ट्रेसबिलिटी प्रणाली अनिवार्य है।
सचिव डॉ. अभिलक्ष लिखी ने बताया कि एमपीईडीए, ईआईसी और वाणिज्य विभाग के समन्वय से बाजार विविधीकरण रणनीति तैयार की गई है। लगभग 40 देशों के साथ संवाद से सकारात्मक संकेत मिले हैं। उन्होंने रेडी-टू-ईट और रेडी-टू-कुक समुद्री उत्पादों पर फोकस बढ़ाने की आवश्यकता बताई।
बैठक में उद्योग प्रतिनिधियों ने कैच सर्टिफिकेट प्रक्रिया को सरल बनाने, समुद्री शैवाल खेती के लिए अनुमति व्यवस्था और फिश फीड उत्पादन को बढ़ावा देने की मांग रखी। साथ ही कोल्ड चेन, मूल्य संवर्धन और निर्यात लॉजिस्टिक्स को मजबूत करने पर भी चर्चा हुई।
इस कार्यक्रम में एमपीईडीए, एनसीडीसी, एनसीईएल, ईआईसी, नाबार्ड, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय सहित कई संस्थानों के अधिकारी शामिल हुए। विभिन्न राज्यों और उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लेकर समुद्री निर्यात क्षेत्र को मजबूत बनाने पर अपने सुझाव दिए।