NEET Exam Reforms: पीएम मोदी ने नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स बनाई

Sun 26-Jul-2026,09:49 PM IST +05:30

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NEET Exam Reforms: पीएम मोदी ने नंदन नीलेकणि की अगुवाई में हाई पावर टास्क फोर्स बनाई NEET Exam Reforms
  • पीएम मोदी ने नंदन नीलेकणि की अगुवाई में परीक्षा सुधारों के लिए हाई पावर टास्क फोर्स बनाई।

  • समिति तकनीकी सुरक्षा, परीक्षा संचालन और प्रशासनिक ढांचे में सुधार के सुझाव देगी।

  • सरकार का लक्ष्य परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।

Delhi / Delhi :

New Delhi / NEET पेपर लीक विवाद के बाद केंद्र सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को इंस्टाग्राम के माध्यम से घोषणा की कि परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, भरोसेमंद और तकनीक आधारित बनाने के लिए इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणि की अध्यक्षता में एक हाई पावर टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह समिति परीक्षा प्रणाली में सुधार से जुड़े विभिन्न पहलुओं का अध्ययन कर अपनी सिफारिशें सरकार को सौंपेगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि सरकार विद्यार्थियों के भविष्य की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने पेपर लीक जैसी घटनाओं के जरिए छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ किया, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा रही है और कई आरोपी जेल में हैं। उन्होंने बताया कि सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की व्यवस्था की है और संसद में परीक्षा संबंधी अपराधों पर कड़े प्रावधानों वाला नया कानून लाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य की परीक्षा प्रणाली केवल सुरक्षित ही नहीं, बल्कि आधुनिक तकनीक से लैस और पूरी तरह विश्वसनीय होनी चाहिए। इसी उद्देश्य से गठित हाई पावर टास्क फोर्स तकनीकी सुरक्षा, परीक्षा संचालन, लॉजिस्टिक्स, प्रशासनिक व्यवस्था और डिजिटल निगरानी जैसे सभी महत्वपूर्ण पहलुओं की समीक्षा करेगी। समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगामी परीक्षाओं के लिए नई व्यवस्था लागू करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।

सरकार द्वारा गठित इस उच्चस्तरीय समिति में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को शामिल किया गया है। इसमें नंदन नीलेकणि के अलावा पूर्व इसरो अध्यक्ष एस. सोमनाथ, पूर्व आईबी निदेशक तपन डेका, आईआईटी मद्रास के निदेशक वी. कामकोटि, पूर्व शिक्षा सचिव अनीता करवाल तथा लॉजिस्टिक्स एवं प्रबंधन विशेषज्ञ अमृत लाल मीणा शामिल हैं। सरकार का मानना है कि इन विशेषज्ञों का अनुभव परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और आधुनिक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

नंदन नीलेकणि भारत के सबसे प्रतिष्ठित प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उनका पूरा नाम नंदन मोहनराव नीलेकणि है। उनका जन्म 2 जून 1955 को बेंगलुरु में हुआ था और उन्होंने आईआईटी बॉम्बे से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। वर्ष 1981 में उन्होंने एन. आर. नारायण मूर्ति और अन्य साथियों के साथ मिलकर Infosys की स्थापना की, जो आगे चलकर भारत की प्रमुख आईटी कंपनियों में शामिल हुई। वे 2002 से 2007 तक कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) और प्रबंध निदेशक रहे तथा बाद में 2017 में कंपनी के चेयरमैन भी बने।

वर्ष 2009 में तत्कालीन यूपीए सरकार ने उन्हें यूआईडीएआई (UIDAI) का पहला अध्यक्ष नियुक्त किया। उनके नेतृत्व में आधार परियोजना की शुरुआत हुई, जिसे आज दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल पहचान प्रणालियों में गिना जाता है। वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बेंगलुरु दक्षिण सीट से चुनाव भी लड़ा, लेकिन भाजपा उम्मीदवार अनंत कुमार से हारने के बाद उन्होंने सक्रिय चुनावी राजनीति से दूरी बना ली।

सरकार का कहना है कि नई टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और तकनीक-सक्षम बनाया जाएगा, ताकि भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके और देश के करोड़ों विद्यार्थियों का भरोसा परीक्षा व्यवस्था पर और मजबूत हो सके।