मध्य प्रदेश में जहरीली शराब से 22 मौतें, अपना दल एस ने उठाए सवाल
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Madhya Pradesh Hooch Tragedy
सागर में जहरीली शराब से 22 लोगों की मौत, करीब 190 लोग अस्पताल में भर्ती।
अपना दल (एस) ने सरकार की स्वास्थ्य एवं प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए।
आर.बी. सिंह पटेल ने जांच, दोषियों पर कार्रवाई और पीड़ितों को सहायता देने की मांग की।
Sagar / मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के आदिवासी क्षेत्रों में दूषित पानी और मलेरिया-डेंगू जैसी गंभीर बीमारियों से हो रही मौतों का मामला अभी शांत भी नहीं हुआ था कि सागर जिले से जहरीली शराब पीने के कारण 22 लोगों की मौत और करीब 190 लोगों के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सामने आ गई। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशासनिक निगरानी और कानून-व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से आम जनता में चिंता और असुरक्षा का माहौल बन रहा है।
अपना दल (एस) ने सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों को प्रदेश सरकार के सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल बताया है। पार्टी ने शासन-प्रशासन को अपनी कार्यप्रणाली में सुधार करने तथा जनहित से जुड़े मामलों में अधिक संवेदनशीलता और सक्रियता के साथ काम करने की नसीहत दी है।
अपना दल (एस) के राष्ट्रीय महासचिव एवं मध्य प्रदेश प्रभारी आर.बी. सिंह पटेल ने कहा कि बालाघाट और सागर की घटनाएं बेहद चिंताजनक हैं। उन्होंने कहा कि लगातार हो रही ऐसी घटनाओं से यह स्पष्ट होता है कि शासन-प्रशासन अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन नहीं कर पा रहा है। उन्होंने सरकार और प्रशासन से जनकल्याण से जुड़े विषयों पर विशेष ध्यान देने तथा व्यवस्था को अधिक चुस्त-दुरुस्त बनाने की अपील की।
आर.बी. सिंह पटेल ने कहा कि जहरीली शराब से होने वाली मौतों को केवल कानून-व्यवस्था का विषय मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। ऐसी घटनाएं प्रशासनिक निगरानी, आबकारी विभाग की कार्यप्रणाली और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों की लापरवाही, उदासीनता और भ्रष्टाचार पर प्रभावी अंकुश लगाने की आवश्यकता है। यदि अवैध शराब के कारोबार पर समय रहते कार्रवाई की जाए, तो इस प्रकार की त्रासदियों को रोका जा सकता है।
उन्होंने मध्य प्रदेश सरकार से मांग की कि सागर जिले की घटना की निष्पक्ष, प्रभावी और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों तथा अवैध शराब के कारोबार से जुड़े दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए। इसके साथ ही, प्रभावित परिवारों को हरसंभव आर्थिक एवं मानवीय सहायता उपलब्ध कराई जाए और अस्पतालों में भर्ती मरीजों के बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
मध्य प्रदेश प्रभारी ने कहा कि सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता आम जनता की सुरक्षा और उसके जीवन की रक्षा होनी चाहिए। प्रशासनिक स्तर पर किसी भी प्रकार की लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करना और अवैध शराब के विरुद्ध सख्त अभियान चलाना आवश्यक है।