NEP 2020 Meeting: समग्र शिक्षा और PM SHRI पर Dharmendra Pradhan का बड़ा बयान
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Education Ministers Conference
धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि स्कूली शिक्षा को मजबूत बनाने में केंद्र और राज्य समान भागीदार हैं।
सम्मेलन में NEP 2020, समग्र शिक्षा, पीएम श्री और निपुण भारत के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर दिया गया।
मातृभाषा आधारित शिक्षा, AI और तकनीक के उपयोग से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
Delhi / केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने में केंद्र और राज्य सरकारें समान भागीदार हैं। उन्होंने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए मिलकर काम करने का आह्वान किया। वह नई दिल्ली स्थित आईसीएआर राष्ट्रीय कृषि विज्ञान परिसर (एनएएससी) में आयोजित स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग (DoSEL) की केंद्र प्रायोजित योजनाओं की समीक्षा के लिए शिक्षा मंत्रियों के दो दिवसीय सम्मेलन की अध्यक्षता कर रहे थे।
अपने संबोधन में धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि यह सम्मेलन केंद्र और राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने तथा शिक्षा से जुड़ी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में तेजी लाने का महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप भविष्य के लिए तैयार, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रणाली का निर्माण ही विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की आधारशिला बनेगा।
उन्होंने कहा कि सम्मेलन में होने वाले विचार-विमर्श से स्कूली शिक्षा में सुधार के लिए नई दिशा मिलेगी और यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में होने वाली आगामी प्रगति समीक्षा बैठक के लिए भी उपयोगी साबित होगा। शिक्षा मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं ने शिक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय बदलाव लाने का काम किया है।
धर्मेंद्र प्रधान ने समग्र शिक्षा, पीएम श्री, निपुण भारत, पीएम पोषण और उल्लास जैसी प्रमुख योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन पहलों के माध्यम से देशभर में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने राज्यों से बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को मजबूत करने, शिक्षकों को आधुनिक प्रशिक्षण देने, शिक्षा में तकनीक और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के उपयोग को बढ़ाने तथा नवाचार को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
उन्होंने विशेष रूप से मातृभाषा आधारित शिक्षा और बहुभाषावाद को बढ़ावा देने पर जोर दिया। उनका कहना था कि प्रारंभिक शिक्षा यदि बच्चे की मातृभाषा में दी जाए तो सीखने के परिणाम बेहतर होते हैं। इसलिए सभी राज्यों को स्थानीय भाषाओं के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए शिक्षा, कौशल विकास एवं उद्यमिता राज्य मंत्री जयंत चौधरी ने भी केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि सहयोगात्मक प्रयासों से ही स्कूली शिक्षा को मजबूत किया जा सकता है और विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में व्यापक सुधार लाया जा सकता है।
दो दिवसीय इस सम्मेलन का उद्देश्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर एक समान, समावेशी और गुणवत्तापूर्ण स्कूली शिक्षा प्रणाली विकसित करना है, जो विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सम्मेलन में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के प्रभावी कार्यान्वयन, शैक्षिक परिणामों में सुधार और राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर विशेष चर्चा हुई।
पहले दिन स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के अतिरिक्त सचिव धीरज साहू ने समग्र शिक्षा और प्रगति ढांचे के तहत विभिन्न मुद्दों पर प्रस्तुति दी। वहीं उप महानिदेशक डॉ. पंकज केपी श्रेयस्कर ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में शिक्षा संबंधी प्रमुख संकेतकों की स्थिति से अवगत कराया। सम्मेलन में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और विभिन्न राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी भाग लेकर शिक्षा क्षेत्र में सहयोग और समन्वय को और मजबूत बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई।