Raipur News: श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में अंशु गुप्ता का प्रेरक व्याख्यान, सम्मान आधारित विकास मॉडल पर दिया जोर

Tue 28-Jul-2026,01:24 PM IST +05:30

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Raipur News: श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय में अंशु गुप्ता का प्रेरक व्याख्यान, सम्मान आधारित विकास मॉडल पर दिया जोर Rawatpura Sarkar University
  • अंशु गुप्ता ने सम्मान आधारित विकास और सामाजिक संवेदनशीलता पर प्रेरक व्याख्यान दिया।

  • गूंज के कार्यों, पुनर्चक्रण और सामुदायिक भागीदारी के मॉडल पर विस्तार से चर्चा हुई।

  • विद्यार्थियों से समाज के प्रति सक्रिय योगदान और जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया गया।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur / श्री रावतपुरा सरकार विश्वविद्यालय, रायपुर के कला संकाय के समाज कार्य विभाग द्वारा "Demystifying Development: Changing the Language and Lenses" विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गूंज (Goonj) के संस्थापक एवं रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित अंशु गुप्ता मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का शुभारम्भ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात राष्ट्रगान एवं छत्तीसगढ़ राज्य गीत का सामूहिक गायन किया गया। विश्वविद्यालय के कुलपति महोदय ने अंशु गुप्ता का पौधा भेंट कर सम्मान किया।

कार्यक्रम के संयोजक एवं समाज कार्य विभागाध्यक्ष डॉ. नरेश कुमार गौतम ने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए मुख्य अतिथि का परिचय दिया। इसके उपरान्त डीन अकादमिक प्रो. मनीष उपाध्याय ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अमृत अनिल राव पुरोहित ने अंशु गुप्ता के सामाजिक योगदानों का उल्लेख करते हुए उनका स्वागत किया। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति ने अपने उद्बोधन में कहा कि अंशु गुप्ता ने समाज के समग्र विकास के लिए नवीन दृष्टिकोण एवं मानवीय संवेदनाओं पर आधारित कार्यों द्वारा देश-विदेश में विशिष्ट पहचान बनाई है।

व्याख्यान हेतु आमंत्रित करते हुए डॉ. नरेश कुमार गौतम ने अंशु गुप्ता के सामाजिक कार्यों एवं गूंज संस्था की उपलब्धियों का संक्षिप्त परिचय प्रस्तुत किया।

अपने प्रेरणादायी व्याख्यान में अंशु गुप्ता ने अपने जीवन संघर्षों और सामाजिक यात्रा का उल्लेख करते हुए बताया कि उनका जन्म उत्तराखण्ड के एक छोटे से गाँव में हुआ। उन्होंने समाज में प्रचलित सोच पर प्रश्न उठाते हुए कहा कि जब कोई ग्रामीण किसान नया प्रयोग करता है तो उसे 'जुगाड़' कहा जाता है, जबकि वही कार्य यदि कोई शहरी अथवा शिक्षित व्यक्ति करे तो उसे 'इनोवेशन' का नाम दिया जाता है। उन्होंने इस मानसिकता में परिवर्तन की आवश्यकता पर बल दिया।

विभिन्न उदाहरणों एवं प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य दुनिया बदलना नहीं, बल्कि दुनिया को बेहतर बनाना है। उन्होंने श्रोताओं से पूछा कि सबसे सुरक्षित स्थान कौन-सा है। अधिकांश लोगों ने 'अपना घर' उत्तर दिया। इसके बाद उन्होंने प्रश्न किया कि क्या सभी लोग अपनी 8–10 वर्ष की बेटी को घर पर अकेला छोड़ने का साहस रखते हैं। इस प्रश्न ने उपस्थित सभी लोगों को गहन आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया।

उन्होंने कहा कि केवल डिजिटल मंचों अथवा डॉट-कॉम से रोटी नहीं मिल सकती; समाज का वास्तविक आधार किसान हैं। उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी संस्थानों में शिक्षा प्राप्त करने वाला प्रत्येक व्यक्ति प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से किसानों का ऋणी है।

अपने जीवन के अनुभव साझा करते हुए उन्होंने देहरादून से दिल्ली आने के बाद फुटपाथों पर रहने वाले लोगों की कठिन परिस्थितियों का वर्णन किया तथा 'हबीब भाई' और 'बानो' की अत्यंत मार्मिक कहानियाँ सुनाईं। विशेष रूप से बानो की कहानी ने उपस्थित श्रोताओं को भावुक कर दिया, जिसमें एक छोटी बच्ची ठंड से बचने के लिए शवों के पास सोने को विवश थी क्योंकि, उसके शब्दों में, "लाश करवट नहीं बदलती और तंग नहीं करती।"

अंशु गुप्ता ने बताया कि गूंज बड़े स्तर पर समाज से उपयोगी सामग्री एकत्रित कर उसका सम्मानजनक पुनः उपयोग सुनिश्चित करती है। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 7.2 करोड़ किलोग्राम सामग्री एकत्रित कर उसका उपयोग समाज के वंचित वर्गों तक पहुँचाने में किया जा चुका है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि गूंज का उद्देश्य केवल वस्तुओं का वितरण करना नहीं है, क्योंकि चैरिटी व्यक्ति की पसंद का अधिकार समाप्त कर देती है। संस्था गाँवों के लोगों से उनकी वास्तविक आवश्यकताओं को जानती है। ग्रामीण समुदाय स्वयं श्रमदान कर पुल, कुएँ, बगीचे तथा अन्य सामुदायिक कार्य करते हैं और उनके योगदान के सम्मानस्वरूप उन्हें आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जाती है। इस मॉडल को उन्होंने 'सम्मान आधारित विकास' की संकल्पना बताया।

उन्होंने पुनर्चक्रण (Recycling) एवं पुनः उपयोग (Reuse) के माध्यम से कम लागत वाले सैनिटरी पैड निर्माण की पहल का भी उल्लेख किया, जो आज देश-विदेश में महिलाओं के स्वास्थ्य एवं गरिमा से जुड़ा एक महत्वपूर्ण प्रयास बन चुका है।

अपने व्याख्यान के अंत में अंशु गुप्ता ने Helping, Sharing and Caring को सामाजिक विकास का मूल मंत्र बताते हुए सभी विद्यार्थियों एवं शिक्षकों से समाज के प्रति संवेदनशील होकर सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के समापन पर कला संकाय की अधिष्ठाता डॉ. गरिमा ने धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि यह व्याख्यान केवल प्रेरणादायक ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति हमारी जिम्मेदारियों का भी बोध कराता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि विश्वविद्यालय परिवार Helping, Sharing and Caring की भावना को अपने जीवन एवं सामाजिक कार्यों में आत्मसात करेगा।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों के अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष, शिक्षकगण, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।