उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन का युवाओं को संदेश, ‘राष्ट्र प्रथम’ और नवाचार पर जोर
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Central Tamil Nadu University
उपराष्ट्रपति का ‘राष्ट्र प्रथम’ संदेश, युवाओं से राष्ट्र निर्माण में योगदान की अपील।
शिक्षा और नवाचार पर जोर, छात्रों से ज्ञान के निर्माता और नेता बनने का आह्वान।
1,103 छात्रों को डिग्री, 616 महिलाएं और 37 छात्राओं को स्वर्ण पदक मिले।
New Delhi / उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने तिरुवरूर स्थित केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय के 11वें दीक्षांत समारोह में हिस्सा लिया और स्नातक छात्रों को महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल डिग्री प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि शिक्षा की परिवर्तनकारी शक्ति, ज्ञान की खोज और विद्यार्थियों की मेहनत, समर्पण तथा दृढ़ता का उत्सव है।
उपराष्ट्रपति ने स्नातकों के साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि बच्चों और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए अभिभावकों तथा शिक्षकों ने अनेक सुख-सुविधाओं का त्याग किया है। उन्होंने तिरुवरूर की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि यह नगर सदियों से आध्यात्मिकता, विद्वत्ता और कलात्मक उत्कृष्टता का केंद्र रहा है। त्यागराज मंदिर की परंपरा से जुड़े इस क्षेत्र ने संतों, विद्वानों और कर्नाटक संगीत की महान त्रिमूर्ति को जन्म दिया है।
श्री सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि वास्तविक महानता तब उभरती है, जब संस्कृति, ज्ञान और मूल्य एक साथ विकसित होते हैं। उन्होंने उच्च शिक्षा के क्षेत्र में पिछले बारह वर्षों में हुए विस्तार का उल्लेख करते हुए दीक्षांत समारोहों में छात्राओं की बढ़ती उपलब्धियों को स्वागत योग्य बताया।
उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य पर जोर देते हुए कहा कि विद्यार्थियों की क्षमता का आकलन केवल परीक्षा और अंकों से नहीं किया जाना चाहिए। स्वतंत्र रूप से सोचने, प्रभावी संवाद करने, सहयोग के साथ काम करने और जीवनभर सीखते रहने की क्षमता भी शिक्षा की सफलता का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान, नवाचार और मूल्य आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय तमिलनाडु विश्वविद्यालय की सराहना की।
उपराष्ट्रपति ने सार्वजनिक परीक्षाओं में अनुचित साधनों की रोकथाम से जुड़े हालिया विधायी प्रयासों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं की निष्पक्षता और छात्रों के हितों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। झारखंड के राज्यपाल के रूप में अपने कार्यकाल को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस दौरान राज्य सरकार द्वारा इसी प्रकार का विधेयक पारित किया गया था और उन्होंने तत्कालीन राज्यपाल के रूप में उस पर हस्ताक्षर कर उसे कानून का रूप दिया था।
उन्होंने कहा कि अच्छे लोगों के हितों की रक्षा के लिए समाज के गलत तत्वों पर कार्रवाई आवश्यक है। सार्वजनिक परीक्षाओं की निष्पक्षता और अखंडता बनाए रखने के लिए प्रभावी और कड़े कदम उठाए जाने चाहिए।
स्नातकों को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने उनसे ज्ञान का केवल उपभोग करने के बजाय उसका निर्माण करने, नकल करने के बजाय नवाचार करने और केवल अनुयायी बनने के बजाय नेतृत्व करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित भारत बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना के साथ अपने ज्ञान, कौशल और नेतृत्व क्षमता का उपयोग देश के विकास में करना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने मादक पदार्थों के खतरे पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों से मादक पदार्थों की तस्करी तथा इसके प्रसार में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि नशीली दवाओं का दुरुपयोग केवल व्यक्ति के जीवन को प्रभावित नहीं करता, बल्कि परिवार और पूरे समाज पर गंभीर असर डालता है। उन्होंने छात्रों से ‘नशीली दवाओं को ना कहें’ की अपील दोहराई और उन्हें अपने मित्रों को भी इससे दूर रहने के लिए प्रेरित करने को कहा।
दीक्षांत समारोह में कुल 1,103 स्नातकों को डिग्रियां प्रदान की गईं, जिनमें शैक्षणिक उत्कृष्टता के लिए 50 स्वर्ण पदक विजेता शामिल रहे। कुल स्नातकों में 616 महिलाएं थीं, जबकि 50 स्वर्ण पदकों में से 37 छात्राओं ने हासिल किए। इस अवसर पर तमिलनाडु के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, लोकसभा सांसद वी. सेल्वराज, कुलाधिपति प्रो. जी. पद्मनाभन, कुलपति वरिष्ठ प्रो. सुलोचना शेखर, शिक्षक, अभिभावक और छात्र उपस्थित रहे।