अलवर में ₹6,453 करोड़ के विकास कार्य, अमित शाह बोले- 2047 तक विकसित भारत का लक्ष्य
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Alwar Development Projects
अलवर में ₹6,453 करोड़ के 954 विकास कार्यों की शुरुआत हुई।
डेयरी, सहकारिता और किसान कल्याण पर अमित शाह ने दिया जोर।
2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के लिए सशक्तिकरण को बताया जरूरी।
New Delhi / केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राजस्थान के अलवर में राज्य सरकार के ₹6,453 करोड़ की लागत वाले 954 विकास कार्यों का लोकार्पण, शिलान्यास और भूमिपूजन किया। इस अवसर पर राजस्थान के मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा, केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे। अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि वर्ष 2047 तक भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बनाने के लिए युवा, गरीब, अन्नदाता और महिलाओं को सशक्त करना जरूरी है।
डेयरी और पशुपालन क्षेत्र पर जोर
अमित शाह ने कहा कि अलवर में 3 लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले दूध प्रोसेसिंग प्लांट का भूमिपूजन किया गया है। जल्द ही इसकी क्षमता बढ़ाकर 5 लाख लीटर प्रतिदिन की जाएगी। उन्होंने कहा कि जब बड़ी मात्रा में दूध गरीब पशुपालकों से डेयरी तक पहुंचेगा और उसका भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में होगा, तो इससे ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।
उन्होंने सहकारिता और डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बताया। उनका कहना था कि ज्यादा दूध देने वाली गाय और भैंस की नस्लों को अलवर सहित राजस्थान के घर-घर तक पहुंचाने की दिशा में काम किया जा रहा है। उन्होंने पशु बीमा की पहल का भी उल्लेख किया और कहा कि आने वाले समय में दूध एवं दुग्ध उत्पादों के निर्यात की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।
चार शहरों में सरस डेयरी प्लांट
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि अलवर के अलावा भीलवाड़ा, जयपुर, पाली और राजसमंद में कुल ₹274 करोड़ की लागत से सरस डेयरी के चार प्लांट शुरू किए जा रहे हैं। इसके साथ ही फलोदी, बालोतरा, डीडवाना-कुचामन और प्रतापगढ़ में चार जिला बैंकों की शुरुआत भी की जा रही है।
इन बैंकों के माध्यम से किसानों को शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण उपलब्ध कराने की बात कही गई। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत DBT के माध्यम से ₹152 करोड़ ट्रांसफर किए गए हैं। वहीं मुख्यमंत्री किसान सम्मान निधि के तहत 67 लाख किसानों को ₹1,000 प्रति किसान की दर से ₹667 करोड़ से अधिक की राशि दी गई है।
अमित शाह ने कहा कि चित्तौड़गढ़ में सुबह शुरू हुए ₹5,500 करोड़ के कार्यों और अलवर में शुरू किए गए ₹6,453 करोड़ के कार्यों को मिलाकर एक ही दिन में राजस्थान में ₹11,953 करोड़ के विकास कार्यों की शुरुआत हुई है।
हर गांव में सहकारी समिति का लक्ष्य
अमित शाह ने कहा कि राजस्थान में वर्तमान में लगभग 44 हजार सहकारी समितियां हैं। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी गांव ऐसा न रहे जहां सहकारी संस्था मौजूद न हो। उन्होंने बताया कि वर्ष 2026-27 में 50 नए गोदाम बनाए जाने हैं। इसके अलावा 100 मीट्रिक टन क्षमता वाले 62 और 500 मीट्रिक टन क्षमता वाले 100 गोदाम पहले ही पूरे किए जा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में किसानों और पशुपालकों के लिए लगातार योजनाएं शुरू की गई हैं। उनके अनुसार 2014 में गोकुल मिशन, 2015 में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना और सॉयल हेल्थ कार्ड, 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और ई-नाम, 2017 में किसान संपदा योजना तथा 2018 में डेढ़ गुना MSP जैसे कदम उठाए गए।
इसके बाद 2019 में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, 2020 में एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर फंड और मत्स्य संपदा योजना, 2021 में सहकारिता मंत्रालय, 2022 में किसान समृद्धि केंद्र, 2023 में अंतरराष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष, 2024 में राष्ट्रीय खाद्य तेल मिशन और 2025 में प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना शुरू की गई।
MSP में बढ़ोतरी का दावा
अमित शाह ने कहा कि केंद्र सरकार ने किसानों की उपज को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का काम बड़े स्तर पर किया है। उन्होंने विभिन्न फसलों के MSP में हुई बढ़ोतरी का उल्लेख करते हुए कहा कि बाजरे के MSP में 130 प्रतिशत, सरसों में 103 प्रतिशत, गेहूं में 84 प्रतिशत, कपास में 120 प्रतिशत और ज्वार में 168 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसानों की आय, उत्पादन और बाजार तक पहुंच को मजबूत करना है।
‘सहकार से समृद्धि’ पर जोर
अमित शाह ने कहा कि सहकारिता मंत्रालय के माध्यम से देश के प्रत्येक गांव को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का लक्ष्य है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए ‘सहकार से समृद्धि’ के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसानों और पशुपालकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि युवा, गरीब, किसान और महिलाएं सशक्त होंगे, तो भारत की विकास यात्रा भी मजबूत होगी और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में देश तेजी से आगे बढ़ सकेगा।