India-Uzbekistan Relations: राष्ट्रपति मुर्मु ने उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री से की मुलाकात
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India-Uzbekistan Relations
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री से राष्ट्रपति भवन में मुलाकात की।
व्यापार, शिक्षा, आईटी, कृषि और रेयर अर्थ मिनरल्स में सहयोग बढ़ाने पर जोर।
भारत-उज्बेकिस्तान रणनीतिक साझेदारी और जन-से-जन संबंधों को मिलेगा नया विस्तार।
New Delhi / भारत और उज्बेकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए उज्बेकिस्तान गणराज्य के विदेश मंत्री महामहिम श्री सईदोव बख्तियार ओदिलोविच ने सोमवार, 3 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति भवन में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने ऐतिहासिक संबंधों, आर्थिक सहयोग, शिक्षा, व्यापार और रणनीतिक साझेदारी को और सुदृढ़ करने पर व्यापक चर्चा की।
राष्ट्रपति भवन में उज्बेकिस्तान के विदेश मंत्री और उनके प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के संबंध केवल कूटनीतिक नहीं, बल्कि सदियों पुराने ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों पर आधारित हैं। उन्होंने कहा कि प्राचीन व्यापारिक मार्गों, साझा सांस्कृतिक विरासत, वास्तुकला, भाषा, संगीत, खान-पान और धार्मिक परंपराओं ने दोनों देशों को लंबे समय से एक-दूसरे से जोड़े रखा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि विदेश मंत्री के साथ आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल और उनकी यात्रा के दौरान आयोजित भारत-उज्बेकिस्तान व्यापार मंच इस बात का प्रमाण हैं कि दोनों देशों के उद्योग जगत के बीच विश्वास और सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कहा कि भारत और उज्बेकिस्तान के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।
उन्होंने विशेष रूप से दुर्लभ मृदा खनिज (Rare Earth Minerals), खनन, कृषि, फार्मास्यूटिकल्स, सूचना प्रौद्योगिकी तथा उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। राष्ट्रपति ने कहा कि इन क्षेत्रों में साझेदारी दोनों देशों की आर्थिक प्रगति और सतत विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित होगी।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षा और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में भी दोनों देशों के सहयोग की सराहना की। उन्होंने बताया कि 3,000 से अधिक उज्बेक अधिकारी, पेशेवर और विद्यार्थी भारत सरकार के आईटीईसी (ITEC) तथा अन्य छात्रवृत्ति कार्यक्रमों का लाभ उठा चुके हैं। वहीं 16,000 से अधिक भारतीय विद्यार्थी उज्बेकिस्तान में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये विद्यार्थी दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और शैक्षिक सेतु का कार्य कर रहे हैं तथा जन-से-जन संबंधों को मजबूत बना रहे हैं।
बैठक के दौरान दोनों नेताओं ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि नियमित उच्चस्तरीय संवाद, व्यापारिक सहयोग और शैक्षणिक आदान-प्रदान से भारत और उज्बेकिस्तान की रणनीतिक साझेदारी को नई दिशा मिलेगी। उन्होंने विश्वास जताया कि वर्तमान यात्रा के दौरान हुई सकारात्मक चर्चाएं भविष्य में दोनों देशों के बीच मित्रता, विश्वास और सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करेंगी।
भारत और उज्बेकिस्तान के बीच बढ़ता सहयोग मध्य एशिया क्षेत्र में भारत की रणनीतिक भागीदारी को मजबूत करने के साथ-साथ व्यापार, निवेश, शिक्षा और तकनीकी सहयोग के नए अवसर भी प्रदान करेगा। यह मुलाकात दोनों देशों के संबंधों को नई ऊर्जा देने और साझा विकास के लक्ष्य को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।