दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' विवादों में: बिना CBFC सर्टिफिकेट OTT पर रिलीज के बाद सरकार सख्त

Wed 15-Jul-2026,10:32 PM IST +05:30

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दिलजीत दोसांझ की 'सतलुज' विवादों में: बिना CBFC सर्टिफिकेट OTT पर रिलीज के बाद सरकार सख्त Satluj Film Vivad
  • बिना CBFC सर्टिफिकेट OTT पर स्ट्रीम हुई फिल्म सतलुज विवादों में।

  • Zee5 के खिलाफ संभावित कानूनी कार्रवाई पर सरकार कर रही विचार।

  • OTT फिल्मों के लिए सेंसर सर्टिफिकेट अनिवार्य बनाने की तैयारी।

Maharashtra / Mumbai :

Mumbai / पंजाबी अभिनेता और गायक दिलजीत दोसांझ की फिल्म 'सतलुज' को लेकर एक नया विवाद सामने आया है, जिसने OTT प्लेटफॉर्म्स पर फिल्म रिलीज से जुड़े नियमों पर बहस छेड़ दी है। सूत्रों के अनुसार, फिल्म को बिना केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) के सर्टिफिकेट के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर स्ट्रीम किया गया, जिसे मौजूदा कानूनी व्यवस्था के तहत गंभीर उल्लंघन माना जा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, बिना सेंसर सर्टिफिकेट किसी फिल्म का सार्वजनिक प्रदर्शन या प्रसारण नियमों के खिलाफ माना जाता है। इसी वजह से अब इस मामले में सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। सूत्रों का कहना है कि केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित फिल्म को प्लेटफॉर्म से हटाने के निर्देश दिए थे, जिन पर अमल भी किया जा चुका है।

हालांकि विवाद केवल फिल्म हटाने तक सीमित नहीं है। बताया जा रहा है कि फिल्म को अपने प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने वाले OTT प्लेटफॉर्म Zee5 की भूमिका की भी जांच की जा रही है। सरकार इस बात पर विचार कर रही है कि क्या इस मामले में कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए। सूत्रों के अनुसार, बिना आवश्यक प्रमाणन के फिल्म प्रसारित किए जाने की जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद सरकार OTT प्लेटफॉर्म्स के लिए नए नियम लाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। माना जा रहा है कि भविष्य में फिल्मों के डिजिटल प्रीमियर को लेकर नियम और अधिक सख्त बनाए जा सकते हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि OTT पर रिलीज होने वाली फिल्मों के लिए भी CBFC का सर्टिफिकेट अनिवार्य किया जा सकता है।

सूत्रों का दावा है कि इसके लिए सूचना प्रौद्योगिकी नियमों (IT Rules) में संशोधन पर विचार किया जा रहा है। यदि यह बदलाव लागू होता है, तो भविष्य में कोई भी नई फिल्म बिना सेंसर बोर्ड की मंजूरी के किसी OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज नहीं की जा सकेगी। इससे डिजिटल मनोरंजन उद्योग के कामकाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार का यह कदम डिजिटल कंटेंट के नियमन को लेकर एक महत्वपूर्ण नीति परिवर्तन साबित हो सकता है। वहीं OTT उद्योग से जुड़े लोग इसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और कंटेंट रेगुलेशन के बीच संतुलन के नजरिए से भी देख रहे हैं।

फिलहाल सरकार की ओर से इस मामले में कोई औपचारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन 'सतलुज' विवाद ने OTT प्लेटफॉर्म्स पर फिल्मों की रिलीज प्रक्रिया को लेकर नए नियमों और संभावित कानूनी बदलावों की चर्चा को तेज कर दिया है। आने वाले दिनों में सरकार का अंतिम रुख इस पूरे क्षेत्र की दिशा तय कर सकता है।