महाराष्ट्र में DRI की बड़ी कार्रवाई: सातारा में अवैध ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़, अल्प्राजोलम और डायजेपाम जब्त
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Satara News
सातारा में डीआरआई ने अवैध ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़ किया।
अल्प्राजोलम, डायजेपाम और 400 लीटर रसायन जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार।
एनडीपीएस अधिनियम के तहत कार्रवाई, पूरे नेटवर्क की जांच जारी।
Mumbai / देश में अवैध मादक पदार्थों के निर्माण और तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने महाराष्ट्र के सातारा जिले में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक गुप्त ड्रग निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में अधिकारियों ने बड़ी मात्रा में अल्प्राजोलम (Alprazolam) और डायजेपाम (Diazepam) सहित इनके निर्माण में उपयोग किए जा रहे रसायनों को जब्त किया है। मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
डीआरआई के अनुसार, 1 अगस्त 2026 को प्राप्त खुफिया सूचना के आधार पर सातारा जिले में छापेमारी की गई। जांच में सामने आया कि यहां एक अवैध प्रयोगशाला में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के तहत प्रतिबंधित मनोरोगी पदार्थों का गुप्त रूप से निर्माण किया जा रहा था। मौके से अवैध फैक्ट्री संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया।
तलाशी के दौरान अधिकारियों ने लगभग 1 किलोग्राम तैयार अल्प्राजोलम, 15 किलोग्राम से अधिक मध्यवर्ती (इंटरमीडिएट) अवस्था में अल्प्राजोलम तथा करीब 3.75 किलोग्राम डायजेपाम बरामद किया। इसके अलावा इन दवाओं के निर्माण में प्रयुक्त लगभग 400 लीटर विभिन्न रसायन, कच्चा माल और रिएक्शन मिश्रण भी जब्त किए गए। सभी बरामद सामग्री को मादक द्रव्य एवं मन:प्रभावी पदार्थ (एनडीपीएस) अधिनियम, 1985 के तहत जब्त कर लिया गया है।
कार्रवाई के बाद डीआरआई की टीम ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए पुणे में संभावित खरीदार की भी पहचान की। त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने उसे भी गिरफ्तार कर लिया। जांच एजेंसियों को ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि बरामद मनोरोगी पदार्थों की बड़े पैमाने पर अवैध तस्करी की तैयारी की जा रही थी।
अल्प्राजोलम और डायजेपाम बेंजोडायजेपाइन वर्ग की दवाएं हैं, जिनका उपयोग चिकित्सकीय निगरानी में चिंता (एंग्जायटी), पैनिक अटैक, अनिद्रा, मिर्गी के दौरे और अन्य तंत्रिका संबंधी बीमारियों के उपचार में किया जाता है। हालांकि, इन दवाओं में लत लगाने वाले और शामक (Sedative) गुण होने के कारण इनका निर्माण, भंडारण और वितरण सख्त कानूनी नियमों के अधीन होता है। बिना अनुमति इनके निर्माण और अवैध कारोबार को गंभीर अपराध माना जाता है।
डीआरआई ने बताया कि शुरुआती जांच में यह भी सामने आया है कि गिरफ्तार आरोपी पहले भी अवैध रूप से नशीले पदार्थों के उत्पादन और तस्करी से जुड़े रहे हैं। एजेंसी अब पूरे नेटवर्क, सप्लाई चेन, वित्तीय लेन-देन और संभावित अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय तस्करी के पहलुओं की जांच कर रही है।
अधिकारियों का कहना है कि अवैध रूप से तैयार किए जाने वाले ऐसे मनोप्रभावी पदार्थ सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। इनके दुरुपयोग से नशे की लत, मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य संबंधी जटिलताएं तथा अन्य गंभीर चिकित्सीय समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। डीआरआई ने स्पष्ट किया कि देश में मादक पदार्थों के अवैध निर्माण और तस्करी के खिलाफ अभियान आगे भी इसी सख्ती के साथ जारी रहेगा।