Tourism Industry Reforms: सरकार और उद्योग जगत ने किया मंथन
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Tourism Industry Reforms
पर्यटन क्षेत्र में व्यापार सुगमता और निवेश बढ़ाने पर जोर।
वीजा, लाइसेंस और डिजिटल प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर चर्चा।
भारत को वैश्विक पर्यटन केंद्र बनाने के लिए सुधारों की दिशा में पहल।
Delhi / भारत को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत बनाने के उद्देश्य से पर्यटन मंत्रालय ने नई दिल्ली में पर्यटन और आतिथ्य उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद सत्र आयोजित किया। केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में पर्यटन क्षेत्र में व्यापार सुगमता बढ़ाने, निवेश को प्रोत्साहित करने और नियामक प्रक्रियाओं को सरल बनाने पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में एफएआईटीएच, फिक्की, सीआईआई, एसोचैम, पीएचडीसीसीआई, डब्ल्यूटीटीसीआईआई और अन्य प्रमुख उद्योग संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी ने मिलकर भारत के पर्यटन क्षेत्र की विकास क्षमता को और अधिक प्रभावी ढंग से सामने लाने के लिए आवश्यक सुधारों पर अपने सुझाव रखे।
पर्यटन मंत्रालय ने इस दौरान अपने सुधार एजेंडा की प्रस्तुति दी और बताया कि होटल एवं आतिथ्य इकाइयों के वर्गीकरण को लाइसेंस प्रक्रियाओं से अलग करने जैसे कई महत्वपूर्ण कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। मंत्रालय का उद्देश्य पर्यटन व्यवसायों के लिए अधिक अनुकूल, प्रतिस्पर्धी और निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करना है।
केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि सरकार पर्यटन क्षेत्र में बाधाओं को कम करने और निवेश बढ़ाने के लिए उद्योग जगत के साथ लगातार संवाद बनाए रखेगी। उन्होंने भारत को विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
पर्यटन सचिव भुवनेश कुमार ने होटल वर्गीकरण प्रणाली को और सरल बनाने, निरीक्षण आधारित मूल्यांकन के बजाय स्व-घोषणा आधारित प्रणाली को बढ़ावा देने तथा अनावश्यक प्रमाणन प्रक्रियाओं को कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उद्योग जगत ने इन प्रस्तावों का स्वागत किया और इन्हें सकारात्मक कदम बताया।
बैठक में वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाने, कर व्यवस्था को अधिक व्यावहारिक बनाने, निवेश स्वीकृतियों में तेजी लाने और पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने जैसे विषयों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि भारत की वैश्विक पर्यटन प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रचार-प्रसार और गंतव्य विपणन की आवश्यकता है।
डिजिटल तकनीक के उपयोग पर भी विशेष जोर दिया गया। दस्तावेजों के सुरक्षित और आसान आदान-प्रदान के लिए "एंटिटी लॉकर" जैसी डिजिटल अवधारणाओं पर विचार-विमर्श हुआ। साथ ही पर्यटन क्षेत्र से जुड़े होटलों, होमस्टे, टूर ऑपरेटरों और गाइडों का एक व्यापक डेटाबेस तैयार करने का सुझाव भी सामने आया, जिससे नीति निर्माण और निवेश योजनाओं को बेहतर बनाया जा सके।
बैठक में अनुभवात्मक पर्यटन, लाइव इवेंट्स, मनोरंजन पार्क और होमस्टे जैसे उभरते क्षेत्रों की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि ये क्षेत्र रोजगार सृजन, स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और भारत के पर्यटन विकल्पों में विविधता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इस संवाद सत्र ने स्पष्ट किया कि सरकार और उद्योग जगत मिलकर भारत को एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इन सुधारों का लाभ निवेशकों, व्यवसायों और पर्यटकों सभी को मिलने की उम्मीद है।