राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का संबोधन: जनजातीय विकास सम्मेलन, स्पेस लैब और ट्रेनिंग फैब का शुभारंभ
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Rashtrapati Bhavan Event
जनजातीय विकास सम्मेलन का राष्ट्रपति द्वारा उद्घाटन.
75 स्पेस लैब और ट्रेनिंग फैब का वर्चुअल शुभारंभ.
शिक्षा और विकास योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने पर जोर.
Delhi / नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर का यह सम्मेलन जनजातीय विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर न केवल सम्मेलन का उद्घाटन किया, बल्कि कई महत्वपूर्ण शैक्षिक और वैज्ञानिक परियोजनाओं का वर्चुअल शुभारंभ भी किया। इनमें IISc बेंगलुरु के ‘सेंटर फॉर नैनो साइंस एंड इंजीनियरिंग’ में ‘ट्रेनिंग फैब’ और देशभर के एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों में 75 ‘स्पेस लैब्स’ शामिल हैं।
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि यह सम्मेलन केवल योजनाओं पर चर्चा का मंच नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समुदायों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने की जिम्मेदारी का अवसर है। उन्होंने जोर देकर कहा कि सभी विकास योजनाओं का अंतिम लक्ष्य जनजातीय क्षेत्रों के हर व्यक्ति तक लाभ पहुंचाना होना चाहिए। चाहे वह पोषण, शिक्षा, रोजगार या स्वास्थ्य से जुड़ा कोई भी विषय हो, हर स्तर पर संवेदनशीलता और प्रतिबद्धता जरूरी है।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों और नीति-निर्माताओं को यह संदेश दिया कि किसी भी परियोजना की फाइल केवल कागज नहीं है, बल्कि वह किसी व्यक्ति के जीवन से जुड़ी उम्मीद होती है। इसलिए हर निर्णय के केंद्र में मानव कल्याण होना चाहिए। उन्होंने कहा कि जब तक योजनाएं जमीनी स्तर तक नहीं पहुंचतीं, तब तक उनका वास्तविक प्रभाव अधूरा रहता है।
उन्होंने यह भी कहा कि जनजातीय समुदायों की संस्कृति, परंपराएं और ज्ञान-व्यवस्था भारत की समृद्ध विरासत का हिस्सा हैं, जिन्हें संरक्षित और प्रोत्साहित करना आवश्यक है। साथ ही, शिक्षा और कौशल विकास को उन्होंने सबसे प्रभावी साधन बताया, जिससे जनजातीय युवा आत्मनिर्भर बन सकते हैं और राष्ट्र निर्माण में योगदान दे सकते हैं।
राष्ट्रपति ने यह भी उल्लेख किया कि देश में लगभग 500 एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए जा चुके हैं, जो जनजातीय बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने सभी हितधारकों से आग्रह किया कि वे पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ कार्य करें ताकि कोई भी जनजातीय परिवार विकास की मुख्यधारा से पीछे न रह जाए।
अंत में राष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि इस सम्मेलन से जो भी सुझाव और रोडमैप सामने आएंगे, वे 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में एक मजबूत आधार प्रदान करेंगे और जनजातीय समाज के समग्र विकास को नई दिशा देंगे।