उपराष्ट्रपति ने कैंसर सर्वाइवर्स को सराहा, आयुष्मान योजना पर जोर
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उपराष्ट्रपति ने कैंसर सर्वाइवर को “योद्धा” बताते हुए कहा कि उनकी कहानियां समाज में उम्मीद और सकारात्मक सोच को बढ़ावा देती हैं।
आयुष्मान भारत योजना के तहत 68 लाख से अधिक कैंसर उपचार, जिसमें अधिकांश ग्रामीण मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिला है।
एचपीवी टीकाकरण और जागरूकता अभियानों के जरिए कैंसर रोकथाम, समय पर जांच और स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया।
Jaipur/ भारत के उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने जयपुर में भगवान महावीर कैंसर अस्पताल एवं अनुसंधान केंद्र द्वारा आयोजित 23वें कैंसर उत्तरजीवी दिवस में हिस्सा लिया। अपने संबोधन में उन्होंने कैंसर से जंग जीत चुके लोगों को साहस और उम्मीद का प्रतीक बताते हुए कहा कि यह दिन मानव आत्मबल और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का उत्सव है।
कार्यक्रम के दौरान उपराष्ट्रपति ने अस्पताल और केजी कोठारी मेमोरियल ट्रस्ट की सराहना करते हुए कहा कि 1997 से यह संस्थान समर्पण और करुणा के साथ कैंसर मरीजों की सेवा कर रहा है और हजारों लोगों के जीवन को नई दिशा दे चुका है। उन्होंने कहा कि इस तरह के संस्थान समाज में स्वास्थ्य सेवाओं की मजबूत नींव तैयार करते हैं।
भारत में बढ़ते कैंसर मामलों पर चिंता जताते हुए उन्होंने भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के आंकड़ों का हवाला दिया, जिसके अनुसार हर साल 15 लाख से अधिक नए मामले सामने आते हैं। उन्होंने बताया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने कैंसर की रोकथाम, समय पर पहचान और बेहतर इलाज के लिए कई योजनाएं लागू की हैं।
उन्होंने विशेष रूप से आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के तहत 13,000 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से 68 लाख से ज्यादा कैंसर उपचार किए जा चुके हैं, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण क्षेत्रों के मरीजों की है। इससे देश में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उपराष्ट्रपति ने बताया कि देशभर में 450 से अधिक डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित किए जा चुके हैं, जिससे मरीजों को स्थानीय स्तर पर इलाज की सुविधा मिल रही है। उन्होंने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत चल रही योजनाओं, जैसे प्रारंभिक जांच और आवश्यक दवाओं की उपलब्धता, को भी महत्वपूर्ण बताया।
निवारक स्वास्थ्य पर जोर देते हुए उन्होंने एचपीवी टीकाकरण कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका लक्ष्य एक करोड़ से अधिक लड़कियों को गर्भाशय ग्रीवा कैंसर से बचाव प्रदान करना है। उन्होंने इस दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय और राज्य सरकारों के प्रयासों की सराहना की।
अपने संबोधन में उन्होंने कैंसर उपचार संस्थानों के बीच बेहतर समन्वय और तकनीकी ज्ञान के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इससे इलाज की गुणवत्ता में सुधार होगा और अधिक से अधिक लोगों तक आधुनिक चिकित्सा सुविधाएं पहुंच सकेंगी।
उपराष्ट्रपति ने तंबाकू, धूम्रपान, नशीले पदार्थों और अस्वास्थ्यकर खानपान के दुष्प्रभावों पर चेतावनी देते हुए कहा कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उन्होंने समाज से जागरूकता बढ़ाने और नियमित स्वास्थ्य जांच को अपनाने का आह्वान किया।
कैंसर से जंग जीत चुके लोगों को “योद्धा” बताते हुए उन्होंने कहा कि उनकी कहानियां समाज के लिए प्रेरणा हैं। उन्होंने डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सेवा भावना की भी सराहना की। कार्यक्रम में हरिभाऊ बागडे, गजेंद्र सिंह खिमसर सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे।