बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, सरकार-विपक्ष के बीच एजेंडों पर मंथन

Tue 27-Jan-2026,07:20 PM IST +05:30

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बजट सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक, सरकार-विपक्ष के बीच एजेंडों पर मंथन Budget Session: All Party Meeting
  • बजट सत्र से पहले रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में सर्वदलीय बैठक.

  • विपक्ष ने किसान, बेरोजगारी और विदेश नीति के मुद्दे उठाए.

  • बजट 1 फरवरी को, सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा.

Delhi / Delhi :

Delhi / संसद के आगामी बजट सत्र से पहले सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं। सरकार ने विधायी और अन्य अहम एजेंडों पर चर्चा के लिए आज सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसकी अध्यक्षता रक्षा मंत्री ने की। इस बैठक में 35 से अधिक राजनीतिक दलों के सांसद शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य बजट सत्र को सकारात्मक, सुचारू और व्यवस्थित ढंग से चलाने को लेकर सभी दलों के बीच सहमति बनाना रहा।

बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत 28 जनवरी को होगी, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक को संबोधित करेंगी। इसके बाद 1 फरवरी को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में आम बजट पेश करेंगी। खास बात यह है कि यह दिन रविवार को पड़ रहा है। यह बजट वित्त मंत्री का लगातार नौवां बजट होगा और मोदी सरकार 3.0 का तीसरा पूर्ण बजट माना जा रहा है।

ऑल पार्टी मीटिंग के बाद केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के आरोपों पर प्रतिक्रिया दी। विपक्ष का कहना था कि सरकार ने अपना विधायी एजेंडा साझा नहीं किया, जिस पर रिजिजू ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति के अभिभाषण के बाद ही सरकार औपचारिक रूप से अपना एजेंडा साझा करती है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में बोलने की आज़ादी के साथ-साथ सुनने की जिम्मेदारी भी जरूरी है। उन्होंने मनरेगा के स्थान पर लाए गए VB-G RAM-G कानून पर चर्चा की मांग को भी खारिज कर दिया।

विपक्षी दलों ने बैठक में कई मुद्दे उठाए। शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि सभी दलों ने अपने-अपने राज्यों से जुड़े मुद्दे सामने रखे हैं, जिनमें प्रदूषण, SIR और बढ़ती बेरोजगारी जैसे विषय शामिल हैं। समाजवादी पार्टी के सांसद राम गोपाल यादव ने बजट को लेकर निराशा जताते हुए कहा कि यह बजट आम जनता के लिए नहीं, बल्कि संपत्ति रखने वालों के हित में होगा।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने बैठक में सरकार की विदेश नीति पर सवाल उठाए। उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे कथित अत्याचारों, अमेरिका के साथ संबंधों और प्रधानमंत्री के सम्मान से जुड़े मुद्दों का ज़िक्र किया। इसके अलावा उन्होंने प्रयागराज में शंकराचार्य से जुड़े विवाद, SIR के नाम पर वोट डिलीट किए जाने और चुनावी पारदर्शिता जैसे मुद्दे भी उठाए।

विपक्ष ने यह भी मांग की कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) पर संसद में चर्चा हो। इसके अलावा ओडिशा में किसानों की स्थिति, भाजपा शासित राज्यों में कानून व्यवस्था, और 16 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर प्रतिबंध से जुड़ा बिल लाने की मांग भी सामने आई।

बजट सत्र के दौरान संसद में कई महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा की संभावना है। लोकसभा में फिलहाल 9 विधेयक लंबित हैं, जिनमें विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक 2025, प्रतिभूति बाजार संहिता 2025 और संविधान (129वां संशोधन) विधेयक 2024 प्रमुख हैं। ये सभी विधेयक अभी संसदीय समितियों की जांच के अधीन हैं।

बजट सत्र से जुड़े कुछ अहम तथ्य भी सामने आए हैं। सत्र 2 अप्रैल तक चलेगा और इस दौरान एक अंतराल भी होगा। पहला चरण 13 फरवरी तक और दूसरा चरण 9 मार्च से 2 अप्रैल तक निर्धारित है। कुल मिलाकर सत्र में 30 बैठकें होंगी। राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 2 से 4 फरवरी तक तीन दिन तय किए गए हैं। 28 जनवरी और 1 फरवरी को शून्यकाल नहीं होगा।

इस बीच कांग्रेस ने भी बजट सत्र की रणनीति को लेकर अपनी तैयारी तेज कर दी है। सर्वदलीय बैठक से पहले कांग्रेस ने संसदीय दल के स्ट्रैटजी ग्रुप की बैठक बुलाई है, जो मंगलवार को CPP चेयरपर्सन सोनिया गांधी के आवास पर होगी। कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने बताया कि बैठक में वोट चोरी, SIR, किसानों के धान की खरीद, MGNREGA की बहाली जैसे मुद्दों पर चर्चा होगी।

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की हालिया रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार का पूंजीगत खर्च FY-27 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है, जो सालाना आधार पर करीब 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि FY-16 में 2.5 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर FY-26 में पूंजीगत खर्च 11.2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है।

कुल मिलाकर, बजट सत्र से पहले हुई यह सर्वदलीय बैठक साफ संकेत देती है कि आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी बहस, राजनीतिक टकराव और अहम नीतिगत फैसलों का दौर देखने को मिल सकता है।