छत्तीसगढ़ विधानसभा: जंबूरी विवाद, शिक्षक मुद्दे पर जोरदार हंगामा
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जंबूरी आयोजन में अनियमितता के आरोपों पर सदन में हंगामा, विपक्ष ने जांच की मांग की और पुनर्वासित नक्सलियों ने कार्यवाही देखी।
स्कूल युक्तियुक्तकरण, अतिथि शिक्षक मानदेय और रायपुर स्कूलों की स्थिति पर सरकार ने जवाब दिया, विपक्ष असंतुष्ट होकर वॉकआउट करता रहा।
Raipur/ छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के 13वें दिन सदन में कई अहम मुद्दों को लेकर तीखी बहस और हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस के विधानसभा घेराव से लेकर जंबूरी आयोजन, शिक्षा व्यवस्था और अतिथि शिक्षकों के मुद्दे पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चलता रहा।
सदन में बीजेपी विधायकों ने कांग्रेस के प्रदर्शन को लेकर सवाल उठाए। मंत्री केदार कश्यप ने तंज कसते हुए कहा कि कांग्रेस के कार्यक्रम में उनके ही नेता मौजूद नहीं थे और कुर्सियां खाली पड़ी थीं। इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने जवाब देते हुए दावा किया कि कार्यक्रम में भारी भीड़ जुटी थी और प्रदेश में सरकार के खिलाफ माहौल बन रहा है।
बालोद में आयोजित जंबूरी कार्यक्रम को लेकर भी सदन में जोरदार बहस हुई। विपक्ष ने आयोजन में कथित अनियमितताओं को लेकर सरकार को घेरा। विधायक राघवेंद्र सिंह ने निर्णय प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आयोजन के लिए टेंडर जारी होने से पहले क्या परिषद की बैठक हुई थी। इस पर स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने स्पष्ट किया कि राज्य कार्यकारिणी की अनुमति से ही प्रक्रिया पूरी की गई थी और स्थान का चयन पहले ही कर लिया गया था।
मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने नारेबाजी करते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया और मामले की जांच की मांग की।
स्कूलों के युक्तियुक्तकरण का मुद्दा भी चर्चा में रहा। बीजेपी विधायक सुनील सोनी ने पूछा कि कितने स्कूलों का पुनर्गठन हुआ और खाली भवनों का उपयोग कैसे किया जाएगा। मंत्री गजेंद्र यादव ने बताया कि प्रदेश में 10,583 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया गया है और खाली संपत्तियों का उपयोग शासकीय कार्यों में किया जाएगा।
रायपुर जिले के स्कूलों की स्थिति को लेकर भी सवाल उठे। विधायक राजेश मूणत और अजय चंद्राकर ने कई स्कूलों में खराब स्थिति का मुद्दा उठाया। मंत्री ने भरोसा दिलाया कि 30 मार्च तक आवश्यक सुधार कार्य पूरे कर लिए जाएंगे।
अतिथि शिक्षकों का मुद्दा भी सदन में गरमाया रहा। विधायक विक्रम मंडावी ने उनके मानदेय और नियमितीकरण पर सवाल किया। मंत्री ने बताया कि अतिथि शिक्षकों को 20 हजार रुपए मानदेय दिया जा रहा है और नियमितीकरण को लेकर कोई वादा नहीं किया गया है। इस जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने फिर हंगामा करते हुए वॉकआउट किया।
सत्र के दौरान एक सकारात्मक पहल भी देखने को मिली। बीजापुर और कांकेर के पुनर्वासित नक्सली पहली बार विधानसभा पहुंचे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को समझने के लिए कार्यवाही का अवलोकन किया।