राज्यसभा बजट सत्र 2026 शुरू, अनुशासन और आर्थिक विज़न पर जोर
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Rajya-Sabha-Budget-Session-2026-Discipline-Economic-Vision
राष्ट्रपति अभिभाषण से प्रेरित होकर सांसदों से रचनात्मक बहस, संसदीय मर्यादा और सार्थक चर्चा सुनिश्चित करने का आह्वान।
भारत की वैश्विक आर्थिक स्थिति, तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर फोकस।
Delhi/ संसद के बजट सत्र की शुरुआत के साथ ही राज्यसभा के 270वें सत्र का औपचारिक आगाज़ हुआ। इस अवसर पर सदन को संबोधित करते हुए पीठासीन अधिकारी ने भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, वैश्विक मंच पर बढ़ते प्रभाव और सांसदों की अहम भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि भारत शीघ्र ही दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और ऐसे समय में संसद की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है।
अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि माननीय राष्ट्रपति के अभिभाषण ने देश की राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को स्पष्ट दिशा दी है और संसद के दोनों सदन उस मार्गदर्शन से प्रेरणा लेकर अपने विधायी एवं विचार-विमर्श संबंधी कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे। बजट सत्र के दौरान कुल 30 बैठकों में केंद्रीय बजट 2026-27 और सरकार के विभिन्न विधायी प्रस्तावों पर गहन चर्चा की जाएगी।
उन्होंने यह भी बताया कि सत्र के बाद विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समितियां अवकाश अवधि में मंत्रालयों और विभागों की अनुदान मांगों की विस्तार से समीक्षा करेंगी। ऐसे में सदस्यों से सदन के साथ-साथ समितियों में भी सक्रिय और सार्थक भूमिका निभाने का आह्वान किया गया।
बजट प्रस्तावों के अलावा इस सत्र में कई अहम विधेयकों पर भी चर्चा होनी है, जिसके लिए पर्याप्त समय निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि विधायी कार्यों की व्यापकता यह दर्शाती है कि संसद के हर क्षण का उपयोग जनता की आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए किया जाना चाहिए।
पीठासीन अधिकारी ने सभी सदस्यों से उच्चतम संसदीय मर्यादा, अनुशासन और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि भारतीय लोकतंत्र विचारों की विविधता और जीवंत बहस से मजबूत होता है, लेकिन यह तभी संभव है जब संवाद सम्मान और रचनात्मकता के साथ हो।
महात्मा गांधी के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनुशासन और ज्ञानोदय से युक्त लोकतंत्र ही सर्वोत्तम व्यवस्था है और संसद में सदस्यों का आचरण इन मूल्यों का प्रतिबिंब होना चाहिए।
अंत में उन्होंने सभी राजनीतिक दलों और सांसदों से सहयोग की अपेक्षा जताई ताकि यह बजट सत्र एक समृद्ध, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की दिशा में मजबूत कदम साबित हो सके और संसदीय लोकतंत्र के उच्चतम मानकों को स्थापित कर सके।