छत्तीसगढ़ में बिजली दर वृद्धि पर AAP का बवाल, राज्यव्यापी प्रदर्शन ऐलान

Wed 01-Apr-2026,06:37 PM IST +05:30

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छत्तीसगढ़ में बिजली दर वृद्धि पर AAP का बवाल, राज्यव्यापी प्रदर्शन ऐलान Chhattisgarh-Power-Tariff-Hike-Aap-Protest
  • छत्तीसगढ़ में बिजली दर बढ़ोतरी के खिलाफ AAP का राज्यव्यापी आंदोलन, आम उपभोक्ताओं पर बढ़ते आर्थिक बोझ को लेकर सरकार पर तीखा हमला।

  • 2 अप्रैल को बिजली दफ्तरों का घेराव, 1 मई तक अल्टीमेटम, मांगें पूरी न होने पर कनेक्शन काटने जैसे सख्त कदम उठाने की चेतावनी।

Chhattisgarh / Raipur :

Raipur/ छत्तीसगढ़ में बिजली दरों में प्रस्तावित बढ़ोतरी को लेकर सियासी माहौल गरमा गया है। आम आदमी पार्टी ने इसे जनविरोधी कदम बताते हुए सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी का कहना है कि राज्य में पहले से ही महंगाई से जूझ रही जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डालना अनुचित है।

रायपुर में आयोजित प्रेस वार्ता में पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता Jaideep Khanuja ने आरोप लगाया कि सरकार बड़े बकायादारों से वसूली करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों पर लगभग 3500 करोड़ रुपये का बकाया है, जबकि कई उद्योगपतियों पर भी भारी राशि लंबित है। इसके बावजूद आम उपभोक्ताओं पर दर वृद्धि थोपना अन्यायपूर्ण है।

AAP ने 2 अप्रैल 2026 को पूरे राज्य में बिजली कार्यालयों के घेराव का ऐलान किया है। रायपुर के बीरगांव स्थित बिजली कार्यालय में शाम 4 बजे बड़े प्रदर्शन की योजना बनाई गई है, जिसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं के शामिल होने की उम्मीद है। पार्टी का कहना है कि यह आंदोलन केवल शुरुआत है और जरूरत पड़ने पर इसे और व्यापक बनाया जाएगा।

पार्टी ने सरकार को 1 मई 2026 तक का अल्टीमेटम देते हुए कहा है कि यदि तब तक बकाया राशि की वसूली नहीं की गई, तो कार्यकर्ता खुद बड़े बकायादारों के खिलाफ कार्रवाई करेंगे, जिसमें कनेक्शन काटने जैसे कदम भी शामिल हो सकते हैं।

AAP का यह भी आरोप है कि बिजली कंपनियां करीब 7000 करोड़ रुपये के घाटे का हवाला देकर दरों में बढ़ोतरी कर रही हैं, जबकि छत्तीसगढ़ जैसे बिजली उत्पादन में अग्रणी राज्य में ऐसी स्थिति नहीं होनी चाहिए। पार्टी ने मांग की है कि सरकार पारदर्शिता के साथ वास्तविक स्थिति सामने लाए।

प्रमुख मांगों में बिजली दर वृद्धि का प्रस्ताव तुरंत वापस लेना, सरकारी और निजी बकायादारों से बकाया वसूली, स्मार्ट मीटर व्यवस्था में सुधार, अनावश्यक खर्चों में कटौती, ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली कटौती पर रोक और ट्रांसफार्मर की मुफ्त सुविधा शामिल हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति का बड़ा केंद्र बन सकता है, खासकर तब जब जनता सीधे तौर पर इससे प्रभावित हो रही है।