नोएडा में कर्मचारियों का प्रदर्शन उग्र, वेतन और शोषण के आरोपों पर सड़कों पर उतरे हजारों श्रमिक
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नोएडा में कर्मचारियों का प्रदर्शन हिंसक हुआ, वेतन गड़बड़ी और शोषण के आरोपों को लेकर सैकड़ों श्रमिक सड़कों पर उतर आए।
प्रशासन ने नए श्रम नियम लागू करने का आश्वासन दिया, लेकिन कर्मचारियों ने पुराने वादों के अनुभव के आधार पर भरोसा जताने से इनकार किया।
Noida/ उत्तर प्रदेश के Noida में प्राइवेट कंपनियों के कर्मचारियों का विरोध प्रदर्शन सोमवार को अचानक उग्र हो गया। पिछले तीन दिनों से जारी असंतोष हिंसक रूप ले बैठा, जिसमें सैकड़ों कर्मचारी सड़कों पर उतर आए। कई स्थानों पर जाम, तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाएं सामने आईं, जिससे प्रशासन को तत्काल हस्तक्षेप करना पड़ा। यह आंदोलन अब केवल स्थानीय मुद्दा न रहकर व्यापक श्रमिक असंतोष का प्रतीक बनता नजर आ रहा है।
प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कंपनियों पर वेतन में गड़बड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्हें वास्तविक रूप से 10 से 15 हजार रुपये वेतन दिया जाता है, जबकि सरकारी दस्तावेजों में 25 हजार रुपये दिखाए जाते हैं। एक महिला कर्मचारी ने बताया कि कम वेतन देने के बावजूद रिकॉर्ड में अधिक सैलरी दर्ज कराई जाती है, जिससे श्रमिकों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि उनसे 10 से 12 घंटे तक काम कराया जाता है, लेकिन ओवरटाइम का उचित भुगतान नहीं किया जाता। साप्ताहिक अवकाश की सुविधा नहीं है और कार्यस्थल पर मेडिकल व सुरक्षा इंतजाम भी अपर्याप्त हैं। महिला कर्मचारियों ने सुरक्षा को लेकर विशेष चिंता जताई है।
यह आंदोलन अब नोएडा से आगे बढ़कर Faridabad तक फैल गया है। फरीदाबाद के सेक्टर-37 में भी हजारों श्रमिकों ने काम बंद कर सड़कों पर प्रदर्शन किया। कई औद्योगिक इकाइयों में उत्पादन प्रभावित हुआ है, जिससे उद्योग जगत में चिंता बढ़ गई है।
स्थिति को नियंत्रण में रखने के लिए पुलिस और प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। संवेदनशील क्षेत्रों में अतिरिक्त बल तैनात किया गया है और कई जगहों पर ट्रैफिक रूट बदल दिए गए हैं। प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने की अपील की है और उनकी समस्याओं के समाधान का आश्वासन दिया है।
जिलाधिकारी ने नए श्रम नियम लागू करने की घोषणा की है, जिसमें ओवरटाइम का दोगुना भुगतान, साप्ताहिक अवकाश, समय पर वेतन भुगतान और महिला सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान शामिल हैं। इसके बावजूद कर्मचारियों का कहना है कि पहले भी ऐसे वादे किए गए, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई बदलाव नहीं हुआ।
कर्मचारियों का गुस्सा इस बात को लेकर है कि नियम केवल कागजों तक सीमित रहते हैं और उनका सही क्रियान्वयन नहीं होता। यह आंदोलन अब केवल वेतन बढ़ाने की मांग नहीं, बल्कि लंबे समय से चले आ रहे कथित शोषण के खिलाफ एक बड़ा संकेत बन गया है।