छिंदवाड़ा हादसे पर सियासत तेज, मुआवजा नीति पर उठे गंभीर सवाल
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छिंदवाड़ा बस हादसे में 10 लोगों की मौत के बाद विपक्ष का सरकार पर हमला, प्रशासनिक लापरवाही और दबाव में यात्रा का आरोप लगाया गया।
कांग्रेस विधायक दल ने मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये सहायता देने का ऐलान, राज्य में बढ़ती सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताई।
Chhindwara/ Chhindwara में गुरुवार शाम हुए दर्दनाक बस हादसे में 10 लोगों की मौत और 40 से अधिक लोगों के घायल होने के बाद प्रदेश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। इस घटना को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखा हमला बोला है।
नेता प्रतिपक्ष Umang Singhar ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हादसे पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए इसे प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री की सभा में भीड़ जुटाने के लिए अधिकारियों द्वारा लोगों पर दबाव बनाया गया था, जिसके चलते जल्दबाजी में यह दुर्घटना हुई।
सिंघार ने कहा कि जनपद पंचायत के सीईओ द्वारा लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने के लिए चेतावनी दी गई थी, और इसी दबाव में वाहन का उपयोग किया गया, जो अंततः हादसे का कारण बना। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने मुआवजा नीति को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि प्रदेश में दुर्घटनाओं के बाद पीड़ित परिवारों को अलग-अलग स्थानों पर अलग-अलग राशि दी जाती है, जिससे असमानता पैदा होती है। उन्होंने सरकार से एक समान और स्पष्ट मुआवजा नीति बनाने की मांग की, ताकि सभी पीड़ितों को समान राहत मिल सके। Umang Singhar ने कांग्रेस विधायक दल की ओर से मृतकों के परिजनों को 50-50 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने का भी ऐलान किया।
उन्होंने आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि पिछले पांच वर्षों में मध्य प्रदेश में 65 हजार से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुई हैं और इस मामले में राज्य देश में दूसरे स्थान पर है। इसके बावजूद सरकार द्वारा ठोस नीति नहीं बनाई गई है, जो चिंता का विषय है।
इस घटना ने न केवल सड़क सुरक्षा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और राहत नीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इस मुद्दे पर क्या कदम उठाती है और पीड़ितों को किस प्रकार राहत प्रदान करती है।