छोटी काशी चैती मेला 2026: तैयारियां चरम पर, पत्रकारों की उपेक्षा पर उठे सवाल
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Chaiti Mela Gola Gokarnnath
28 मार्च से शुरू होगा ऐतिहासिक चैती मेला.
पत्रकारों को पास और सुविधाओं की कमी पर नाराजगी.
जमीन की बोली बढ़ने और बिजली व्यवस्था पर सवाल.
Kashi / Gola Gokarnnath, जिसे “छोटी काशी” के नाम से जाना जाता है, एक बार फिर अपने ऐतिहासिक चैती मेले को लेकर चर्चा में है। 28 मार्च से 16 अप्रैल तक चलने वाले इस मेले को लेकर क्षेत्र में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। चैत माह की शुरुआत के साथ ही यह मेला हर साल श्रद्धा, आस्था और सांस्कृतिक परंपराओं का केंद्र बन जाता है। दूर-दराज़ से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं, वहीं स्थानीय लोग भी पूरे उत्साह के साथ इसकी तैयारियों में जुटे हुए हैं।
मेले की रौनक जहां एक ओर चरम पर पहुंचने की उम्मीद है, वहीं दूसरी ओर कुछ गंभीर सवाल भी उठ रहे हैं। इस बार पत्रकारों को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था पर नाराजगी सामने आई है। जानकारी के अनुसार, इस वर्ष किसी भी पत्रकार को पास उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है और न ही उनके लिए कोई विशेष सुविधा सुनिश्चित की गई है। ऐसे में पत्रकार वर्ग खुद को उपेक्षित महसूस कर रहा है।
पत्रकारों का कहना है कि वे हमेशा बिना किसी स्वार्थ के समाज और प्रशासन के बीच सेतु का काम करते हैं। जनहित से जुड़ी हर खबर को प्रमुखता से उठाते हैं, लेकिन जब इतने बड़े आयोजन में उनकी भूमिका को नजरअंदाज किया जाता है, तो यह चिंता का विषय बन जाता है। कई पत्रकारों ने यह सवाल भी उठाया कि बिना पास या व्यवस्था के वे अपने परिवार के साथ मेले में कैसे शामिल हो पाएंगे।
वहीं, इस बार मेले में जमीन की बोली दोगुनी किए जाने से दुकानदारों और व्यापारियों की परेशानी भी बढ़ गई है। बढ़ी हुई लागत का सीधा असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है, जिससे मेले में आने वाले लोगों को अधिक खर्च उठाना पड़ेगा।
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जहां एक ओर प्रशासन 24 घंटे बिजली आपूर्ति की बात कर रहा है, वहीं मेला स्थल पर अंधेरे की स्थिति देखने को मिल रही है। स्ट्रीट लाइट्स लगे होने के बावजूद पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पा रही है, जिससे सुरक्षा और सुविधा दोनों पर सवाल उठ रहे हैं।
पत्रकारों ने प्रशासन से मांग की है कि इस मुद्दे को गंभीरता से लिया जाए और उनके लिए भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि वे अपनी जिम्मेदारी निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से निभा सकें।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि प्रशासन इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या पत्रकारों की आवाज़ को उचित महत्व मिलता है या नहीं।