छत्तीसगढ़ में 18 मार्च को कर्मचारी प्रदर्शन
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Chhattisgarh-Employees-Protest-March-18
नियमितीकरण, पिंगुआ कमेटी रिपोर्ट, पंचायत सचिवों का शासकीयकरण और सेवानिवृत्ति आयु 65 वर्ष करने जैसी कई मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की चेतावनी।
छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर 18 मार्च को प्रदेशभर के जिला और ब्लॉक मुख्यालयों में कर्मचारियों का राज्यव्यापी प्रदर्शन होगा।
Raipur/ छत्तीसगढ़ में सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों की लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज होने जा रहा है। छत्तीसगढ़ कर्मचारी अधिकारी फेडरेशन के आह्वान पर 18 मार्च को प्रदेशभर में जिला और ब्लॉक मुख्यालयों पर बड़े स्तर पर प्रदर्शन किया जाएगा। फेडरेशन का कहना है कि कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें वर्षों से लंबित हैं, लेकिन सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस फैसला नहीं लिया गया। इसी के विरोध में कर्मचारी राज्यव्यापी प्रदर्शन कर अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करेंगे।
फेडरेशन के पदाधिकारियों के अनुसार सबसे प्रमुख मांग जुलाई 2016 से लंबित महंगाई भत्ता (डीए) एरियर्स के भुगतान की है। कर्मचारियों का कहना है कि यह राशि लंबे समय से बकाया है और इसका भुगतान अभी तक नहीं किया गया है। संगठन ने मांग की है कि डीए एरियर्स की पूरी राशि कर्मचारियों के जीपीएफ खातों में जमा की जाए, ताकि उन्हें इसका लाभ मिल सके।
इसके अलावा कर्मचारी संगठनों ने चार स्तरीय समयमान वेतनमान लागू करने की मांग भी उठाई है। फेडरेशन के अनुसार कर्मचारियों को 8, 16, 24 और 32 वर्ष की सेवा पूरी करने पर समयमान वेतनमान दिया जाना चाहिए। इससे कर्मचारियों को सेवा के दौरान बेहतर आर्थिक सुरक्षा और प्रोत्साहन मिल सकेगा।
कर्मचारी संगठनों ने अर्जित अवकाश के नगदीकरण की सीमा बढ़ाने की भी मांग की है। फिलहाल इसकी सीमा कम है, जिसे बढ़ाकर 300 दिन करने की मांग की जा रही है। संगठन का कहना है कि इससे कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के समय आर्थिक रूप से अधिक लाभ मिलेगा।
इसके साथ ही फेडरेशन ने कई अन्य महत्वपूर्ण मांगें भी सरकार के सामने रखी हैं। इनमें पिंगुआ कमेटी की रिपोर्ट को सार्वजनिक करना, शिक्षकों की सेवा गणना पहली नियुक्ति तिथि से करना, सहायक शिक्षकों और सहायक पशु चिकित्सा अधिकारियों को त्रिस्तरीय समयमान वेतनमान देना, अनुकंपा नियुक्ति में 10 प्रतिशत की सीमा समाप्त करना और पंचायत सचिवों का शासकीयकरण शामिल है।
इसके अलावा नगरीय निकाय कर्मचारियों को नियमित वेतन, सेवानिवृत्ति की आयु 65 वर्ष करने, संविदा और दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण तथा रिक्त पदों पर जल्द भर्ती की मांग भी प्रमुख रूप से उठाई गई है।
फेडरेशन का कहना है कि यदि सरकार ने जल्द ही इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो कर्मचारियों का आंदोलन और तेज किया जाएगा। 18 मार्च को होने वाले इस राज्यव्यापी प्रदर्शन में बड़ी संख्या में कर्मचारी और अधिकारी शामिल हो सकते हैं।