31 मार्च तक नक्सलमुक्त छत्तीसगढ़ का दावा, सरकार बोली- फाइनल टच बाकी
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बस्तर में लघु वनोपज आधारित विकास मॉडल, स्थानीय रोजगार और आय बढ़ाने पर फोकस, उद्योगपतियों को जमीन देने की योजना से सरकार ने किया इनकार।
समर्पित नक्सलियों के लिए पुनर्वास योजना लागू, आवास, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण की सुविधा, पंचायतों को नक्सलमुक्त घोषित करने पर प्रोत्साहन राशि।
Raipur/ छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। राज्य सरकार ने दावा किया है कि 31 मार्च 2026 तक प्रदेश पूरी तरह नक्सलमुक्त हो जाएगा। डिप्टी सीएम और गृहमंत्री Vijay Sharma ने कहा कि अब केवल “फाइनल टच” बाकी है। बीते दो वर्षों में बड़े पैमाने पर नक्सलियों के समर्पण, गिरफ्तारी और एनकाउंटर से हालात तेजी से बदले हैं।
‘सार्थक संवाद’ कार्यक्रम में बातचीत के दौरान विजय शर्मा ने बताया कि करीब 3000 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, जबकि हजारों की संख्या में गिरफ्तारियां और मुठभेड़ भी हुई हैं। उनका कहना है कि बड़े नक्सली लीडर या तो मारे जा चुके हैं या फिर मुख्यधारा में लौट आए हैं। “पापा राव” जैसे नामों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अब संगठन का ढांचा कमजोर हो चुका है।
सरकार का दावा है कि 31 मार्च से पहले शेष बचे नक्सलियों को भी पुनर्वास की प्रक्रिया में शामिल कर लिया जाएगा। जो लोग आत्मसमर्पण नहीं करेंगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही नक्सल प्रभावित पंचायतों को नक्सलमुक्त घोषित करने के लिए प्रोत्साहन योजना भी लागू की गई है, जिसमें एक करोड़ रुपये तक की राशि दी जा रही है।
बस्तर क्षेत्र के विकास को लेकर सरकार ने स्पष्ट किया है कि यहां की अर्थव्यवस्था लघु वनोपज पर आधारित होगी। मुख्यमंत्री Vishnu Deo Sai की नीति के तहत स्थानीय लोगों की आय बढ़ाने और रोजगार सृजन पर जोर दिया जा रहा है। सरकार ने यह भी साफ किया कि बस्तर को किसी बड़े उद्योगपति को सौंपने की कोई योजना नहीं है।
समर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए सरकार ने व्यापक योजना तैयार की है। इसके तहत आवास, रोजगार और कौशल प्रशिक्षण दिया जाएगा। करीब 15,000 घरों का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 4000 घर पहले ही दिए जा चुके हैं। शिक्षा और आजीविका के लिए विशेष योजनाएं भी लागू की जा रही हैं।
नक्सलमुक्ति के बाद सरकार का फोकस बुनियादी ढांचे के विकास पर रहेगा। सड़क, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के साथ महिला स्व-सहायता समूहों को मजबूत किया जाएगा। “लखपति दीदी” जैसी योजनाओं के जरिए आर्थिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।
हालांकि, इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है। गृहमंत्री ने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ लोग नक्सलमुक्ति जैसे गंभीर विषय पर भी राजनीति कर रहे हैं। सरकार का मानना है कि बस्तर अब हिंसा से विकास की ओर बढ़ रहा है और तय समयसीमा में लक्ष्य हासिल करना एक बड़ी उपलब्धि होगी।