बलरामपुर में फिर मिली अवैध अफीम की खेती
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बलरामपुर के कुसमी क्षेत्र में चंदाडांडी गांव में अवैध अफीम की खेती का नया मामला सामने आया, पुलिस ने खेत को कब्जे में लेकर निगरानी शुरू की।
पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मामले पर सरकार से सवाल उठाए, झारखंड सीमा से सटे इलाके में सक्रिय नेटवर्क की आशंका।
बलरामपुर/ छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में अवैध अफीम की खेती के मामलों ने प्रशासन और पुलिस की चिंता बढ़ा दी है। कुसमी विकासखंड के करोंधा थाना क्षेत्र के चंदाडांडी गांव में पुलिस ने अफीम की अवैध खेती का एक और मामला उजागर किया है। सूचना मिलने के बाद पुलिस की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और खेत को अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि पुलिस ने खेत के आसपास सुरक्षा घेरा बनाकर पूरी रात निगरानी की, ताकि कोई भी व्यक्ति सबूतों को नष्ट न कर सके। मामले के सामने आने के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। ग्रामीणों में भी इस बात को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि आखिर दूरस्थ और सुनसान इलाकों में इस तरह की अवैध गतिविधियां कैसे संचालित हो रही हैं।
इस मामले ने राजनीतिक हलकों में भी हलचल पैदा कर दी है। प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर सरकार और प्रशासन से सवाल उठाए थे। इसके बाद यह मामला और अधिक सुर्खियों में आ गया। बताया जा रहा है कि यह गांव झारखंड की सीमा से सटा हुआ है, जिससे जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है।
गौरतलब है कि इससे पहले 10 मार्च को कुसमी थाना क्षेत्र के त्रिपुरी गांव में करीब 2 एकड़ जमीन पर अवैध अफीम की खेती मिलने से प्रशासन में हड़कंप मच गया था। उस समय मौके पर जिला प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी पहुंचे थे और तत्काल कार्रवाई की गई थी। इस मामले में पुलिस ने दो खेत मालिकों समेत सात संदिग्ध लोगों को गिरफ्तार किया था।
कार्रवाई के दौरान नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो की मौजूदगी में सौ से अधिक मजदूरों को लगाकर अफीम के पौधों को उखाड़कर नष्ट कराया गया था। जांच के दौरान खेत से अफीम के सूखे फल भी बरामद किए गए, जिन्हें पुलिस ने जब्त कर लिया।
प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ लोगों ने ग्रामीणों से खेत लीज पर लेकर अवैध रूप से अफीम की खेती करवाई थी। इस मामले में झारखंड और बिहार से जुड़े लोगों के नेटवर्क की भी आशंका जताई जा रही है। जानकारी के अनुसार खेती के लिए झारखंड से मजदूर बुलाए गए थे और खेत की सुरक्षा के लिए विद्युत प्रवाहित तारों का घेराव किया गया था।
बताया जा रहा है कि अफीम की खेती करने वालों ने दूरस्थ और पहुंच से दूर इलाकों को चुना, ताकि उनकी गतिविधियां लंबे समय तक नजरों से दूर रह सकें। उन्होंने ग्रामीणों को फूलों की खेती का लालच देकर जमीन लीज पर ली और बाद में उसी जमीन पर नशीले पदार्थ की अवैध खेती शुरू कर दी।
त्रिपुरी में कार्रवाई जारी रहने के दौरान ही चंदाडांडी गांव में भी अफीम की खेती मिलने की खबर सामने आई। इसके बाद पुलिस और प्रशासन की सतर्कता और बढ़ गई है। सीमावर्ती इलाकों में लगातार ऐसे मामलों के सामने आने से यह आशंका भी जताई जा रही है कि इस अवैध कारोबार के पीछे एक संगठित नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। अब पुलिस और जांच एजेंसियां पूरे मामले की गहन जांच कर रही हैं। आने वाले दिनों में इस अवैध नेटवर्क से जुड़े और लोगों के सामने आने की संभावना जताई जा रही है।