उज्जैन बोरवेल हादसे में मासूम की मौत, 22 घंटे चला रेस्क्यू अभियान
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NDRF और SDRF टीम ने JCB और ऑक्सीजन सपोर्ट से लगातार बचाव प्रयास किए, लेकिन गहराई और चट्टानों से अभियान बाधित हुआ।
उज्जैन के झलारिया गांव में 2 साल का बच्चा 200 फीट गहरे खुले बोरवेल में गिरा, 22 घंटे रेस्क्यू के बाद भी नहीं बच सका।
UJJAIN/ उज्जैन जिले के बड़नगर तहसील के झलारिया गांव में एक दर्दनाक हादसे ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया। राजस्थान के रहने वाले 2 साल के मासूम भागीरथ देवासी की बोरवेल में गिरने से मौत हो गई। बच्चा खेलते समय अचानक लगभग 200 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था, जिसके बाद तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।
करीब 22 घंटे तक चले इस बचाव अभियान में NDRF और SDRF की टीमें लगातार मौके पर मौजूद रहीं। JCB मशीनों की मदद से खुदाई कर बच्चे तक पहुंचने की कोशिश की गई। साथ ही पाइप के जरिए ऑक्सीजन भी पहुंचाई जा रही थी ताकि बच्चे को जीवित रखा जा सके। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका।
जानकारी के अनुसार, बच्चा लगभग 60 से 70 फीट की गहराई में फंसा हुआ था। रेस्क्यू टीम ने सुबह तक लगभग 40 फीट तक खुदाई कर ली थी, लेकिन बीच में कठोर चट्टानों के कारण कार्य धीमा पड़ गया, जिससे बचाव अभियान में देरी हुई।
हादसे के बाद पूरे गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। बच्चे के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। ग्रामीणों ने भी रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद करने की कोशिश की, लेकिन गहराई और तकनीकी चुनौतियों के कारण सफलता नहीं मिल सकी।
स्थानीय प्रशासन और बचाव दल लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। घटना की गंभीरता को देखते हुए उच्च अधिकारियों को भी सूचित किया गया।
इस दुखद घटना पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गहरा शोक व्यक्त किया है और परिवार के प्रति संवेदना जताई है। प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश भी दिए हैं ताकि भविष्य में ऐसे हादसों को रोका जा सके।
यह घटना एक बार फिर खुले बोरवेल को ढकने और सुरक्षा उपायों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे खुले बोरवेल बच्चों के लिए जानलेवा खतरा बनते जा रहे हैं और इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है।