गांधीनगर में दूषित पानी से टाइफाइड फैलने पर NHRC सख्त
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NHRC ने गांधीनगर में दूषित पेयजल से फैले टाइफाइड मामलों को गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन मानते हुए राज्य सरकार से जवाब तलब किया।
नई पेयजल पाइपलाइन में लीकेज के कारण सीवेज मिला पानी सप्लाई हुआ, जिससे बच्चों में टाइफाइड संक्रमण तेजी से फैला।
Gujrat/ राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने गुजरात की राजधानी गांधीनगर में दूषित पेयजल आपूर्ति से टाइफाइड के मामलों में हुई तेज़ बढ़ोतरी को लेकर स्वतः संज्ञान लिया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शहर के एक इलाके में टाइफाइड के 70 सक्रिय मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें बड़ी संख्या बच्चों की है। इस स्थिति को गंभीर मानते हुए आयोग ने इसे संभावित मानवाधिकार उल्लंघन करार दिया है।
जांच में सामने आया है कि हाल ही में बिछाई गई पेयजल पाइपलाइन में गंभीर तकनीकी खामियां हैं। पाइपलाइन में कम से कम सात स्थानों पर लीकेज पाया गया, जिसके कारण सीवेज का पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया। डॉक्टरों ने पुष्टि की है कि यह जलजनित बीमारी का मामला है और संक्रमण दूषित जल के कारण फैला है।
एनएचआरसी ने इस पूरे मामले में गुजरात के मुख्य सचिव को नोटिस जारी करते हुए दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। आयोग ने रिपोर्ट में मरीजों की वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति, घर पर इलाज करा रहे और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या, तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए गए ठोस कदमों की जानकारी देने को कहा है।
गांधीनगर सिविल अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के चलते 30 बिस्तरों वाला विशेष पीडियाट्रिक वार्ड स्थापित किया गया है। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, मरीज तेज बुखार, पेट दर्द और कमजोरी जैसी शिकायतों के साथ पहुंच रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रभावित इलाकों में जल आपूर्ति की जांच, क्लोरीनेशन और वैकल्पिक स्वच्छ पानी की व्यवस्था की जा रही है।
यह मामला न केवल सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सुरक्षित पेयजल जैसे बुनियादी मानवाधिकार की गंभीर अनदेखी को भी उजागर करता है।