ईरान युद्ध के बीच PM मोदी की बड़ी बैठक, तेल-LPG पर एक्शन प्लान

Sun 22-Mar-2026,11:33 PM IST +05:30

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ईरान युद्ध के बीच PM मोदी की बड़ी बैठक, तेल-LPG पर एक्शन प्लान ईरान युद्ध के बीच PM मोदी की बड़ी बैठक, तेल-LPG पर एक्शन प्लान
  • ईरान युद्ध के बीच पीएम मोदी ने 3 घंटे की बैठक में तेल, गैस और उर्वरक सप्लाई को लेकर व्यापक एक्शन प्लान तैयार किया। 

  • वैकल्पिक आयात स्रोत, मजबूत लॉजिस्टिक्स और निर्यात बढ़ाने पर जोर, सभी मंत्रालयों को समन्वय के साथ काम करने के निर्देश। 

  • आम जनता को राहत देने के लिए निर्बाध आपूर्ति और कीमत नियंत्रण पर फोकस, सरकार की सतर्क रणनीति सामने आई। 

Delhi / New Delhi :

नई दिल्ली/ पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान युद्ध की स्थिति के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने ईंधन आपूर्ति को लेकर उच्चस्तरीय बैठक की। करीब तीन घंटे चली इस बैठक में तेल, गैस और जरूरी संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर व्यापक चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी और आम नागरिकों को न्यूनतम असुविधा सुनिश्चित की जाएगी।

ईरान से जुड़े बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच प्रधानमंत्री Narendra Modi ने आज मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की। यह बैठक करीब तीन घंटे तक चली, जिसमें देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर विस्तृत रणनीति पर चर्चा की गई।

बैठक में पेट्रोलियम, कच्चा तेल, गैस, बिजली और उर्वरक जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों की स्थिति का आकलन किया गया। प्रधानमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पूरे देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। उन्होंने लॉजिस्टिक्स और वितरण प्रणाली को मजबूत बनाने पर विशेष जोर दिया, ताकि किसी भी संकट की स्थिति में सप्लाई चेन प्रभावित न हो।

इस उच्चस्तरीय बैठक में Amit Shah, Rajnath Singh, S. Jaishankar और Nirmala Sitharaman समेत कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए। यह बैठक सुरक्षा मामलों की कैबिनेट समिति के तहत आयोजित की गई, जो रणनीतिक निर्णय लेने वाली सर्वोच्च संस्था मानी जाती है।

बैठक में लिए गए प्रमुख फैसले

बैठक के दौरान अल्पकालिक, मध्यमकालिक और दीर्घकालिक उपायों पर विस्तार से चर्चा की गई। सरकार ने स्पष्ट किया कि भविष्य में ईंधन और उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए वैकल्पिक स्रोतों पर भी काम किया जाएगा।

रिपोर्ट्स के अनुसार, रसायन, फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स जैसे उद्योगों के लिए आवश्यक कच्चे माल के आयात स्रोतों में विविधता लाने की योजना बनाई जा रही है। इसके साथ ही निर्यात को बढ़ावा देने के लिए नए वैश्विक बाजारों की तलाश पर भी जोर दिया गया।

प्रधानमंत्री ने यह भी निर्देश दिया कि सभी मंत्रालय और विभाग “संपूर्ण-सरकारी दृष्टिकोण” (Whole-of-Government Approach) के तहत समन्वय बनाकर काम करें। इसके लिए मंत्रियों और सचिवों का एक विशेष समूह गठित करने की बात भी सामने आई है, जो स्थिति की लगातार निगरानी करेगा।

आम जनता पर प्रभाव

सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि आम जनता को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो। इसके लिए ईंधन वितरण प्रणाली को मजबूत करने और आवश्यक वस्तुओं की कीमतों को नियंत्रित रखने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ने के बावजूद भारत की तैयारी इस संकट से निपटने के लिए पर्याप्त है, बशर्ते आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावी ढंग से प्रबंधित किया जाए।

ईरान युद्ध के बीच भारत सरकार की यह सक्रियता दिखाती है कि ऊर्जा सुरक्षा और आम जनता की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है। समय पर उठाए गए कदम भविष्य के संकट को टालने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।