Prayagraj Cold Storage Collapse: मलबे में दबे मजदूर, अमोनिया गैस लीक से मचा हड़कंप
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Prayagraj Cold Storage Collapse
कोल्ड स्टोरेज गिरने से बड़ा हादसा.
अमोनिया गैस रिसाव से दहशत.
SDRF-NDRF द्वारा रेस्क्यू ऑपरेशन जारी.
Prayagraj / उत्तर प्रदेश के Prayagraj से एक बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। सोमवार दोपहर करीब ढाई बजे फाफामऊ इलाके में स्थित एक विशाल कोल्ड स्टोरेज की बहुमंजिला इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। देखते ही देखते पूरी इमारत मलबे के ढेर में तब्दील हो गई और आसपास अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में 20 से अधिक मजदूरों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और तुरंत राहत व बचाव कार्य शुरू कर दिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बचाव अभियान युद्धस्तर पर चलाया जा रहा है।
मौके पर 5 जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम तेजी से जारी है। इसके साथ ही अत्याधुनिक उपकरणों का इस्तेमाल कर मलबे में दबे लोगों को खोजने की कोशिश की जा रही है। रेस्क्यू ऑपरेशन को और प्रभावी बनाने के लिए State Disaster Response Force (SDRF) और National Disaster Response Force (NDRF) की टीमों को भी तत्काल बुलाया गया है।
हादसे को और गंभीर बना दिया कोल्ड स्टोरेज से हो रहे अमोनिया गैस के रिसाव ने। इमारत गिरने के बाद बड़ी मात्रा में जहरीली गैस लीक होने लगी, जिसकी तीखी गंध करीब एक किलोमीटर तक फैल गई है। आसपास के लोगों को सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन की शिकायत हो रही है। कई लोग मुंह पर कपड़ा या गमछा बांधकर खुद को बचाने की कोशिश कर रहे हैं।
प्रशासन ने एहतियात के तौर पर इलाके में अलर्ट जारी कर दिया है और लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है। गैस रिसाव को नियंत्रित करने के लिए विशेषज्ञ टीमों को भी बुलाया गया है, जो स्थिति को संभालने में जुटी हैं।
इस बीच पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए कोल्ड स्टोरेज के मैनेजर को हिरासत में ले लिया है और उससे पूछताछ की जा रही है। हादसे की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की गई है, जो इमारत के निर्माण, गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों में किसी तरह की लापरवाही की जांच करेगी।
बताया जा रहा है कि यह कोल्ड स्टोरेज समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक अंसार अहमद का है और करीब 60 एकड़ में फैला हुआ है। यहां रोजाना 100 से अधिक लोग काम करते हैं, हालांकि हादसे के वक्त अंदर कितने लोग मौजूद थे, इसकी स्पष्ट जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
फिलहाल प्रशासन का पूरा ध्यान मलबे में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने और घायलों को जल्द से जल्द इलाज उपलब्ध कराने पर है। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।