सीतापुर में LPG कनेक्शनों पर सख्त नियम, अब केवल डिजिटल भुगतान से मिलेगा सिलेंडर
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Sitapur LPG New Rules
एलपीजी सिलेंडर भुगतान में नकद लेन-देन पूरी तरह बंद.
पिछले 12 महीनों की औसत खपत के आधार पर सिलेंडर आपूर्ति.
डिजिटल भुगतान और दस्तावेजी प्रक्रिया अनिवार्य.
Sitapur / उत्तर प्रदेश के Sitapur में एलपीजी कनेक्शनों को लेकर नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। Indian Oil Corporation Limited (आईओसीएल) के लखनऊ इंडेन क्षेत्रीय कार्यालय ने ‘एग्जेम्प्टेड’ यानी छूट प्राप्त श्रेणी वाले गैस कनेक्शनों के लिए नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इन निर्देशों के तहत अब सरकारी संस्थानों और अधिकृत संगठनों को गैस सिलेंडर प्राप्त करने के लिए तय डिजिटल और प्रशासनिक नियमों का कड़ाई से पालन करना होगा। अधिकारियों के अनुसार यह कदम एलपीजी की आपूर्ति व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और संभावित दुरुपयोग को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया है।
जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अब एलपीजी सिलेंडर के भुगतान में नकद लेन-देन पूरी तरह बंद कर दिया गया है। संस्थानों को सिलेंडर प्राप्त करने के लिए केवल अपने पंजीकृत आधिकारिक बैंक खाते से ही भुगतान करना होगा। भुगतान की प्रक्रिया भी पूरी तरह औपचारिक होगी, जिसमें एनईएफटी, आरटीजीएस या चेक के माध्यम से ही राशि जमा की जा सकेगी। इसके अलावा किसी भी व्यक्तिगत बैंक खाते से भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। इंडियन ऑयल के अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान की अनिवार्यता से वित्तीय लेन-देन में पारदर्शिता आएगी और संस्थागत उपयोग के लिए दिए जाने वाले सिलेंडरों की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी।
नए नियमों में सिलेंडर आपूर्ति की सीमा भी तय कर दी गई है। अब किसी भी संस्था को गैस सिलेंडर की आपूर्ति उसके पिछले 12 महीनों की औसत खपत के आधार पर ही की जाएगी। यानी जिस संस्थान ने पिछले एक वर्ष में जितनी औसत खपत दर्ज की है, उसी के अनुसार भविष्य में उसे सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इस व्यवस्था से अनावश्यक मांग या अतिरिक्त सिलेंडर लेने की प्रवृत्ति पर रोक लगेगी और आपूर्ति का बेहतर प्रबंधन संभव होगा।
इसके साथ ही यह भी स्पष्ट किया गया है कि ग्राहकों को केवल उसी गैस एजेंसी से सिलेंडर मिलेगा जो वर्तमान में उन्हें सेवा प्रदान कर रही है। दूसरी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों या एजेंसियों से गैस सिलेंडर प्राप्त करने की अनुमति नहीं होगी। इंडियन ऑयल के अनुसार इस नियम का उद्देश्य वितरण प्रणाली को व्यवस्थित रखना और रिकॉर्ड को स्पष्ट बनाए रखना है।
नए निर्देशों में सिलेंडर वितरण प्रक्रिया को भी अधिक सख्त बनाया गया है। अब सिलेंडर प्राप्त करते समय डिलीवरी से जुड़े दस्तावेजों पर सिलेंडर का सीरियल नंबर दर्ज करना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही संस्था के अधिकृत प्रतिनिधि के हस्ताक्षर और आधिकारिक मुहर भी लगानी होगी। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सिलेंडर सही संस्था तक पहुंचा है और उसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित संस्थान की होगी।
इंडियन ऑयल ने यह भी स्पष्ट किया है कि एलपीजी सिलेंडर का उपयोग केवल उसी परिसर में किया जा सकेगा जो कनेक्शन के समय पंजीकृत किया गया है। सिलेंडर को किसी अन्य स्थान पर ले जाकर उपयोग करने की अनुमति नहीं होगी। यदि ऐसा पाया जाता है तो संबंधित संस्था के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
इन नए नियमों का सीधा असर कई सरकारी और अर्द्धसरकारी संस्थानों पर पड़ेगा। इनमें Kasturba Gandhi Balika Vidyalaya, Jawahar Navodaya Vidyalaya तथा Mid-Day Meal Scheme से जुड़े कनेक्शन शामिल हैं। इसके अलावा सीतापुर जिला जेल सहित कई अन्य संस्थानों को भी इन दिशा-निर्देशों का पालन करना होगा।
अधिकारियों के अनुसार यह नई व्यवस्था एलपीजी के दुरुपयोग को रोकने, आपूर्ति प्रणाली को पारदर्शी बनाने और संस्थागत गैस कनेक्शनों के उपयोग पर बेहतर निगरानी रखने के लिए लागू की गई है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन नियमों के लागू होने से एलपीजी वितरण प्रणाली अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनेगी।