स्वर्णरेखा नदी में मिला संदिग्ध बम, सेना की मदद लेने की तैयारी

Sat 21-Mar-2026,04:05 PM IST +05:30

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स्वर्णरेखा नदी में मिला संदिग्ध बम, सेना की मदद लेने की तैयारी Jharkhand Bomb News
  • स्वर्णरेखा नदी में मिला 227 किलो का बम.

  • इलाके को सील कर बढ़ाई गई सुरक्षा.

  • बम निष्क्रिय करने के लिए सेना की मदद संभव.

Jharkhand / Jamshedpur :

Jamshedpur / झारखंड के पूर्वी सिंहभूम जिले के सीमावर्ती बहारागोड़ा थाना क्षेत्र के पानीपीड़ा इलाके में स्थित स्वर्णरेखा नदी में एक संदिग्ध और शक्तिशाली बम मिलने की खबर से पूरे इलाके में हड़कंप मच गया है। यह बम मंगलवार को नदी में बालू की खुदाई के दौरान मजदूरों और स्थानीय लोगों की नजर में आया। शुरुआत में ग्रामीणों ने इसे किसी भारी धातु का टुकड़ा समझा, लेकिन करीब से देखने पर इसके बम होने की आशंका जताई गई। इसके बाद ग्रामीणों ने तुरंत स्थानीय प्रशासन और पुलिस को सूचना दी। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि शुरुआती सूचना के बावजूद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से नहीं लिया और तत्काल कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। दो दिन बाद गुरुवार को रांची से बम निरोधक दस्ते की टीम मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच के बाद पुष्टि की कि यह वास्तव में एक अत्यंत शक्तिशाली और खतरनाक बम है। अधिकारियों के अनुसार इसका आकार काफी बड़ा है और वजन लगभग 227 किलो के आसपास बताया जा रहा है। विशेषज्ञों ने बताया कि इसकी संरचना और संवेदनशीलता को देखते हुए इसे सामान्य तरीके से निष्क्रिय करना संभव नहीं है। यही कारण है कि अब इसे सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय करने के लिए विशेष तकनीकी सहायता की आवश्यकता पड़ रही है।

बम की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने एहतियात के तौर पर उस पूरे इलाके को सील कर दिया है जहां यह बम मिला है और आसपास के ग्रामीणों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे उस स्थान के पास न जाएं और किसी भी तरह की छेड़छाड़ से बचें। सुरक्षा एजेंसियां लगातार क्षेत्र की निगरानी कर रही हैं ताकि किसी प्रकार की दुर्घटना न हो सके। अधिकारियों का कहना है कि इतने बड़े और संवेदनशील बम को निष्क्रिय करने के लिए अब भारतीय सेना की विशेषज्ञ टीम की मदद ली जा सकती है। इसके लिए संबंधित विभागों की ओर से सेना को पत्र भेजने की तैयारी की जा रही है। उल्लेखनीय है कि लगभग सात महीने पहले पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल के गोपीबल्लापुर थाना क्षेत्र के पास भी स्वर्णरेखा नदी में इसी तरह का एक पुराना बम मिला था, जिसे बाद में कोलकाता स्थित वायुसेना और बम विशेषज्ञों की मदद से सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय किया गया था। स्थानीय बुजुर्गों का मानना है कि वर्ष 1971 के युद्ध के समय इस पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां काफी अधिक थीं, संभव है कि उसी दौर के कुछ विस्फोटक अवशेष समय-समय पर नदी या जमीन के अंदर से बाहर आ रहे हों। फिलहाल प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी सतर्कता बरतते हुए स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और लोगों से अफवाहों से दूर रहने की अपील की जा रही है।