MP में TET अनिवार्यता पर बवाल: 1.5 लाख शिक्षक सड़कों पर, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी

Wed 08-Apr-2026,11:54 PM IST +05:30

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MP में TET अनिवार्यता पर बवाल: 1.5 लाख शिक्षक सड़कों पर, सरकार को दी आंदोलन की चेतावनी MP TET Controversy
  • टीईटी अनिवार्यता के खिलाफ 1.5 लाख शिक्षकों का विरोध. 

  • सरकार पर नियमों के उल्लंघन का आरोप. 

  • भोपाल में बड़े आंदोलन की चेतावनी. 

Madhya Pradesh / Jabalpur :

Jabalpur / मध्य प्रदेश में सरकार के नए आदेश ने शिक्षक समुदाय में तीखा आक्रोश पैदा कर दिया है। ‘अध्यापक-शिक्षक संयुक्त मोर्चा’ के बैनर तले प्रदेशभर के लगभग 1.5 लाख शिक्षकों ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) को अनिवार्य बनाने के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। शिक्षकों का कहना है कि यह निर्णय न सिर्फ उनके अनुभव का अपमान है, बल्कि उनके भविष्य को भी अनिश्चित बना रहा है।

कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, सरकार को चेतावनी
बुधवार को जबलपुर में शिक्षकों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। राज्य समन्वयक भरत पटेल सहित कई वरिष्ठ नेताओं ने सरकार के आदेशों की कड़ी आलोचना की। उनका आरोप है कि लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) और जनजातीय कार्य विभाग द्वारा 2 मार्च और 26 मार्च 2026 को जारी आदेश सुप्रीम कोर्ट की भावना के विपरीत हैं। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा दे रहे शिक्षकों पर अचानक परीक्षा थोपना मानसिक दबाव और अन्याय के समान है।

नया आदेश क्या कहता है?
जबलपुर जिला अध्यक्ष उमाशंकर पटेल के अनुसार, सरकार के नए नियमों के तहत अब उन शिक्षकों को भी टीईटी पास करना अनिवार्य होगा, जो पहले से वर्षों से पढ़ा रहे हैं लेकिन ‘नॉन-टीईटी’ श्रेणी में आते हैं। यदि वे परीक्षा पास नहीं कर पाते, तो उनकी नौकरी तक जा सकती है। यही बात शिक्षकों के बीच सबसे बड़ी चिंता का कारण बनी हुई है।

शिक्षकों के तर्क और नियमों का हवाला
आंदोलन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद (NCTE) के दिशा-निर्देशों के अनुसार 3 सितंबर 2001 से पहले नियुक्त शिक्षकों को टीईटी से छूट दी गई है। इसके अलावा, 2011 से 2014 के बीच संविदा के रूप में नियुक्त ‘गुरुजी संवर्ग’ को भी विशेष प्रावधानों के तहत छूट प्राप्त है। ऐसे में सरकार का यह नया आदेश नियमों के विपरीत बताया जा रहा है।

सिर्फ टीईटी नहीं, कई और मांगें भी
यह विरोध केवल टीईटी तक सीमित नहीं है। शिक्षकों ने अपनी अन्य मांगों को भी सामने रखा है। इनमें प्रमुख रूप से मार्च 2026 के आदेशों को रद्द करना, वरिष्ठता की गणना पहली नियुक्ति तिथि से करना, और पेंशन, ग्रेच्युटी, अवकाश नकदीकरण जैसे वैधानिक लाभ सुनिश्चित करना शामिल है। उनका कहना है कि लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उन्हें उनके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है।

आंदोलन तेज करने की तैयारी
जबलपुर में हुआ यह प्रदर्शन राज्यव्यापी आंदोलन का हिस्सा है। शिक्षकों ने साफ चेतावनी दी है कि अगर सरकार उनकी मांगों पर ध्यान नहीं देती, तो वे आंदोलन को और तेज करेंगे। इसी क्रम में भोपाल में ‘मुख्यमंत्री अनुरोध यात्रा’ निकालने की तैयारी भी शुरू कर दी गई है, जिसमें बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल होंगे।

निष्कर्ष: बढ़ता तनाव, समाधान की दरकार
शिक्षकों और सरकार के बीच यह टकराव अब गंभीर रूप लेता जा रहा है। एक तरफ शिक्षक अपने अधिकारों और सम्मान की बात कर रहे हैं, तो दूसरी ओर सरकार शिक्षा की गुणवत्ता और मानकों को बनाए रखने की बात कह रही है। ऐसे में जरूरी है कि दोनों पक्ष बातचीत के जरिए समाधान निकालें, ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और शिक्षकों का भविष्य भी सुरक्षित रह सके।