जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में CSIR समीक्षा बैठक

Tue 06-Jan-2026,06:58 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

जितेंद्र सिंह की अध्यक्षता में CSIR समीक्षा बैठक Csir-Review-Meeting-Jitendra-Singh-Aerospace-Innovation
  • वैज्ञानिक अनुसंधान का सामाजिक और आर्थिक प्रभाव रोजगार सृजन, स्टार्टअप और उद्योग विस्तार में सुनिश्चित करने पर बल।

  • केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने CSIR की उच्च स्तरीय बैठक में एयरोस्पेस प्रौद्योगिकी और स्वदेशी क्षमताओं के विकास पर जोर दिया।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान, पीएमओ, अंतरिक्ष और परमाणु ऊर्जा विभाग जितेंद्र सिंह ने आज अनुसंधान भवन में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में देश में एयरोस्पेस और अन्य उच्च तकनीकी क्षेत्रों में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण और नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई।

सीएसआईआर की महानिदेशक एवं डीएसआईआर की सचिव एन. कलाइसेल्वी ने विकसित भारत की राष्ट्रीय परिकल्पना के अनुरूप देश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए महत्वपूर्ण रोडमैप प्रस्तुत किया। इसमें मिशन-उन्मुख अनुसंधान, संस्थागत सुधार और वैज्ञानिक परिणामों के सामाजिक और आर्थिक प्रभाव पर जोर दिया गया। विशेष रूप से एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं के निर्माण और रणनीतिक आत्मनिर्भरता बढ़ाने पर फोकस किया गया।

केंद्रीय मंत्री ने सीएसआईआर की 37 प्रयोगशालाओं को मीडिया, उद्योग और स्थानीय समुदायों से जुड़कर अपने अनुसंधान और नवाचार को जमीनी स्तर पर प्रदर्शित करने की सलाह दी। उन्होंने वैज्ञानिक कार्यक्रमों के प्रभाव को रोजगार सृजन, उद्यमिता और सामाजिक कल्याण के संदर्भ में आंकने का महत्व बताया।

जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्टार्टअप, प्रौद्योगिकी तैनाती और क्षेत्रीय प्रभाव की सफलता की कहानियों को साझा करना आवश्यक है, ताकि नवाचार का मूल्य नीति निर्धारकों और जनता दोनों द्वारा समझा जा सके। इस बैठक में तकनीकी विवरणों के बजाय जमीनी लाभ और सामाजिक प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया गया।

सीएसआईआर की परियोजनाओं का उद्देश्य उच्च स्तरीय अनुसंधान को मजबूत करना, बाहरी निर्भरता कम करना और नवाचार-आधारित विकास के माध्यम से दीर्घकालिक आर्थिक और सामाजिक लाभ सुनिश्चित करना है। केंद्रीय मंत्री ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए निरंतर समर्थन और रणनीतिक दृष्टिकोण बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।