नई RDSNS तकनीक से ठंडे परमाणुओं का तात्कालिक और सुरक्षित घनत्व मापन संभव

Thu 08-Jan-2026,03:54 PM IST +05:30

ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |

Follow Us

नई RDSNS तकनीक से ठंडे परमाणुओं का तात्कालिक और सुरक्षित घनत्व मापन संभव RDSNS-Cold-Atoms-Density-Duantum-Technology
  • नई RDSNS तकनीक ठंडे परमाणुओं का स्थानीय घनत्व बिना नुकसान पहुंचाए तुरंत मापने में सक्षम है, जो क्वांटम कंप्यूटिंग के लिए अहम है।

  • राष्ट्रीय क्वांटम मिशन समर्थित यह खोज क्वांटम सेंसिंग, सिमुलेशन और उन्नत सेंसर तकनीकों के विकास को गति दे सकती है।

Delhi / New Delhi :

DELHI/ वैज्ञानिकों ने क्वांटम प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए ठंडे परमाणुओं के स्थानीय घनत्व को तुरंत और बिना नुकसान पहुंचाए मापने की नई तकनीक विकसित की है। यह खोज क्वांटम कंप्यूटिंग और क्वांटम सेंसिंग जैसे अत्याधुनिक क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है, जहां परमाणुओं की क्वांटम अवस्था की वास्तविक समय जानकारी अत्यंत आवश्यक होती है।

पारंपरिक ठंडे परमाणु प्रयोगों में लेज़र शीतलन और ट्रैपिंग तकनीकों के जरिए परमाणुओं को लगभग पूर्ण शून्य तापमान तक ठंडा किया जाता है, जिससे उनके क्वांटम गुण स्पष्ट रूप से सामने आते हैं। अब तक इन परमाणुओं की अवस्था और संख्या जानने के लिए अवशोषण और प्रतिदीप्ति इमेजिंग जैसी विधियों का उपयोग होता रहा है, लेकिन ये तकनीकें या तो परमाणुओं को प्रभावित कर देती हैं या सघन एटॉमिक क्लाउड्स में सटीक परिणाम नहीं दे पातीं।

इन चुनौतियों का समाधान निकालते हुए रमन अनुसंधान संस्थान (RRI) के वैज्ञानिकों ने रमन ड्रिवन स्पिन नॉइज़ स्पेक्ट्रोस्कोपी (RDSNS) नामक तकनीक का सफल प्रदर्शन किया है। यह विधि लेज़र प्रकाश के ध्रुवीकरण में होने वाले सूक्ष्म उतार-चढ़ाव को मापकर परमाणुओं के प्राकृतिक स्पिन फ्लक्चुएशन का विश्लेषण करती है। इसके लिए दो अतिरिक्त रमन लेज़र बीम का उपयोग किया जाता है, जो परमाणु अवस्थाओं के बीच सुसंगत संक्रमण उत्पन्न कर सिग्नल को लगभग दस लाख गुना तक बढ़ा देती हैं।

इस तकनीक की खास बात यह है कि यह केवल 0.01 मिमी³ के छोटे से क्षेत्र में मौजूद लगभग 10,000 परमाणुओं के स्थानीय घनत्व का प्रत्यक्ष और सटीक मापन करती है। पारंपरिक तरीकों के विपरीत, RDSNS केवल कुल परमाणु संख्या नहीं बल्कि यह बताती है कि किसी विशेष स्थान पर परमाणु कितनी सघनता से मौजूद हैं।

शोधकर्ताओं ने इस तकनीक को पोटेशियम परमाणुओं पर लागू कर देखा और पाया कि एटम क्लाउड का केंद्रीय घनत्व एक सेकंड के भीतर स्थिर हो जाता है, जबकि प्रतिदीप्ति विधि से कुल परमाणु संख्या मापने में लगभग दोगुना समय लगता है। यह अंतर दर्शाता है कि स्थानीय और वैश्विक मापन के बीच कितना महत्वपूर्ण फर्क हो सकता है।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह गैर-विनाशकारी और कम-पावर आधारित तकनीक माइक्रोसेकंड स्तर पर भी उच्च सटीकता प्रदान करती है। यह असममित और गतिशील रूप से बदलते एटॉमिक क्लाउड्स में भी प्रभावी ढंग से काम करती है, जहां पारंपरिक गणितीय रूपांतरण विफल हो जाते हैं।

राष्ट्रीय क्वांटम मिशन के अंतर्गत समर्थित यह शोध क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम सिमुलेशन, उच्च-संवेदनशील सेंसर और गैर-संतुलन गतिकी जैसे क्षेत्रों में नई संभावनाओं के द्वार खोलता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक क्वांटम अनुसंधान में वास्तविक-समय निदान को नई दिशा देगी और भविष्य की क्वांटम मशीनों की नींव को और मजबूत करेगी।