MCC ने बदले क्रिकेट के नियम
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MCC ने टेस्ट क्रिकेट में आखिरी ओवर नियम बदलकर विकेट गिरने के बाद भी खेल जारी रखने का फैसला किया।
लैमिनेटेड बैट, हिट विकेट, ओवरथ्रो और डेड बॉल नियमों में भी बड़े और स्पष्ट बदलाव किए गए।
Delhi/ क्रिकेट के इतिहास में एक बड़े बदलाव की तैयारी हो चुकी है। खेल के नियम तय करने वाली सर्वोच्च संस्था मेरिलबोन क्रिकेट क्लब (MCC) ने क्रिकेट लॉ में अब तक के सबसे व्यापक संशोधनों को मंजूरी दे दी है। इन बदलावों का सबसे गहरा असर टेस्ट क्रिकेट पर दिखेगा, जहां दिन के आखिरी ओवर में विकेट गिरने पर भी खेल रोका नहीं जाएगा। कुल 73 संशोधित नियम 1 अक्टूबर 2026 से लागू होंगे, जो खेल की निष्पक्षता और रोमांच दोनों को नया आयाम देंगे।
MCC ने टेस्ट क्रिकेट के सबसे चर्चित नियमों में से एक, लॉ 12.5.2 में बड़ा बदलाव किया है। अब यदि दिन के अंतिम ओवर में विकेट गिरता है, तो खेल वहीं समाप्त नहीं होगा। नया बल्लेबाज तुरंत मैदान में आएगा और आखिरी ओवर हर हाल में पूरा कराया जाएगा। पहले यह नियम बल्लेबाजी टीम के पक्ष में माना जाता था, जिससे गेंदबाजों को नुकसान और खेल का रोमांच कम हो जाता था।
MCC का मानना है कि दिन का अंतिम ओवर गेंदबाजों के लिए सबसे अनुकूल समय होता है। ऐसे में विकेट गिरने पर खेल रोक देना फील्डिंग टीम के साथ अन्याय है। MCC ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव समय बचाने के लिए नहीं, बल्कि खेल में संतुलन और प्रतिस्पर्धा बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।
यह 2017 के लॉ कोड के बाद तीसरा बड़ा संशोधन है। पहले बदलाव 2019 में, दूसरा 2022 में और अब तीसरा संशोधन 2026 के लिए तय किया गया है। इन नियमों पर आगे ICC की क्रिकेट कमेटी चर्चा करेगी, ताकि इन्हें अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की प्लेइंग कंडीशन्स में शामिल किया जा सके। घरेलू क्रिकेट में इन नियमों को लागू करने का निर्णय संबंधित राष्ट्रीय बोर्ड्स पर छोड़ा गया है।
MCC ने वयस्क रिक्रिएशनल क्रिकेट में लैमिनेटेड बैट्स को भी वैध कर दिया है। ये बैट अधिकतम तीन लकड़ी के टुकड़ों से बनते हैं, सामान्य बैट्स से सस्ते होते हैं और इंग्लिश विलो की बढ़ती कीमतों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इससे पहले 2017 से जूनियर क्रिकेट में इनकी अनुमति थी।
हिट विकेट नियम में भी स्पष्टता लाई गई है। शॉट खेलने के बाद संतुलन बिगड़ने से विकेट गिरने पर बल्लेबाज आउट होगा, जबकि फील्डर से टकराने पर विकेट गिरा तो नॉट आउट माना जाएगा। इसी तरह ओवरथ्रो, मिसफील्ड और डेड बॉल की परिभाषाओं में भी साफ अंतर तय कर दिया गया है, जिससे अंपायरिंग में भ्रम की गुंजाइश कम होगी।