बीजापुर महिला क्रिकेट फाइनल: अनामिका चेरपा ने 82 रन से बनाया रिकॉर्ड
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बीजापुर महिला क्रिकेट फाइनल में स्पोर्ट्स अकादमी ने 100 रनों से महिला पुलिस लाइन को हराकर खिताब अपने नाम किया।
प्रतियोगिता में पहली बार शामिल हुई आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों की टीम ने शानदार प्रदर्शन कर सभी को प्रभावित किया।
Bijapur/ छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में आयोजित महिला क्रिकेट प्रतियोगिता ने क्रिकेट प्रेमियों को रोमांच से भर दिया। 36वें यातायात जागरूकता माह 2026 के अंतर्गत आयोजित इस टूर्नामेंट में कई रिकॉर्ड बने, जिनमें सबसे बड़ा नाम रहा अनामिका चेरपा का।
फाइनल मुकाबला बीजापुर स्पोर्ट्स अकादमी और महिला पुलिस लाइन टीम के बीच खेला गया। स्पोर्ट्स अकादमी ने पहले बल्लेबाजी करते हुए महज 8 ओवर में 156 रनों का विशाल स्कोर खड़ा किया, जो मिनी स्टेडियम बीजापुर का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर माना गया।
अनामिका चेरपा ने मात्र 15 गेंदों में 82 रन बनाए। उनकी पारी में 13 गगनचुंबी छक्के शामिल थे। चौथे ओवर में उन्होंने लगातार 6 छक्के लगाकर बीजापुर क्रिकेट इतिहास में नया अध्याय जोड़ दिया। उनके इस प्रदर्शन के कारण उन्हें वूमेन ऑफ द सीरीज घोषित किया गया। अनामिका पहले सॉफ्टबॉल में राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी भी रह चुकी हैं।
महिला पुलिस लाइन टीम ने 156 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए केवल 52 रन बनाए। इस तरह स्पोर्ट्स अकादमी ने 100 रनों के अंतर से फाइनल जीतकर खिताब अपने नाम किया। जांगला महिला टीम ने तीसरा स्थान प्राप्त किया।
इस वर्ष प्रतियोगिता में एक विशेष पहल के तहत आत्मसमर्पित महिला नक्सलियों की टीम को भी शामिल किया गया। पहली बार मैदान में उतरी इस टीम ने सेमीफाइनल तक का सफर तय किया। उनके जज्बे और उत्कृष्ट प्रदर्शन की बीजापुर के कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक और जिला पंचायत सीईओ ने खुलकर सराहना की।
पुरस्कार वितरण समारोह में विजेता टीम को ₹12,500 नकद और ट्रॉफी दी गई, उपविजेता टीम को ₹10,000 और कप मिला। तृतीय स्थान के लिए ₹7,000 और कप तथा विशेष पुरस्कार के रूप में आत्मसमर्पित महिला टीम को ₹5,000 प्रदान किया गया।
कलेक्टर संबित मिश्रा ने कहा कि खेल से अनुशासन और जिम्मेदारी विकसित होती है। पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेंद्र यादव ने कहा कि यातायात नियमों के पालन से सुरक्षित समाज की नींव मजबूत होती है। सीईओ नम्रता चौबे ने खिलाड़ियों को खेल भावना और उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया।
इस टूर्नामेंट ने न सिर्फ महिला खिलाड़ियों के खेल कौशल को बढ़ावा दिया बल्कि समाज में महिला सशक्तिकरण और खेल संस्कृति को भी मजबूत किया।