IDAS प्रोबेशनर्स से उपराष्ट्रपति की बातचीत, बोले- ईमानदारी और जिम्मेदारी से करें देश सेवा

Wed 30-Sep-2026,10:19 PM IST +05:30

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IDAS प्रोबेशनर्स से उपराष्ट्रपति की बातचीत, बोले- ईमानदारी और जिम्मेदारी से करें देश सेवा IDAS Probationers
  • उप-राष्ट्रपति ने IDAS 2025 बैच के प्रोबेशनर्स से संवाद किया।

  • रक्षा भूमि प्रबंधन में ई-छावनी और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर जोर दिया।

  • युवा अधिकारियों से ईमानदारी, जिम्मेदारी और नैतिक आचरण के साथ काम करने की अपील।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / उप-राष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने उप-राष्ट्रपति भवन में इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस यानी IDAS के 2025 बैच के प्रोबेशनर्स से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने युवा अधिकारियों से देश सेवा के इस अवसर का पूरी लगन, ईमानदारी और मजबूत सार्वजनिक जिम्मेदारी की भावना के साथ इस्तेमाल करने का आह्वान किया।

बातचीत के दौरान उप-राष्ट्रपति ने कहा कि प्रोबेशनर्स में से कई छोटे शहरों से आए हैं। उनके अनुसार, यह दिखाता है कि लगन और कड़ी मेहनत के जरिए कथित बाधाओं को पार किया जा सकता है। उन्होंने अधिकारियों से अपनी उपलब्धियों पर गर्व करने के साथ-साथ लोक सेवक के तौर पर मिलने वाली जिम्मेदारियों को समझने की भी अपील की।

सी. पी. राधाकृष्णन ने डिफेंस एस्टेट्स ऑर्गनाइजेशन की भूमिका को भी महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि देशभर में लगभग 18 लाख एकड़ रक्षा भूमि के प्रबंधन की जिम्मेदारी संगठन के पास है। इस जिम्मेदारी में राष्ट्रीय संपत्तियों की सुरक्षा, नागरिक सुविधाएं उपलब्ध कराना, रक्षा बुनियादी ढांचे को बेहतर बनाना और सशस्त्र बलों की ऑपरेशनल तैयारियों में सहयोग करना शामिल है।

उपराष्ट्रपति ने रक्षा संपदा प्रबंधन में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल की भी सराहना की। खासतौर पर उन्होंने ‘ई-छावनी’ पहल का उल्लेख किया, जिसके जरिए छावनी क्षेत्रों में स्मार्ट गवर्नेंस और एकीकृत जनसेवा वितरण को मजबूत करने का प्रयास किया गया है।

उन्होंने कहा कि आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, GIS, ड्रोन सर्वे, सैटेलाइट इमेजिंग, ऑटोमेटेड चेंज डिटेक्शन और 3D विजुअलाइजेशन जैसी तकनीकें रक्षा भूमि प्रबंधन को अधिक सटीक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद कर सकती हैं।

हालांकि, उप-राष्ट्रपति ने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक के साथ मानवीय जिम्मेदारी का महत्व कम नहीं होता। उन्होंने कहा, “तकनीक को जवाबदेही को मजबूत करना चाहिए, न कि उसकी जगह लेनी चाहिए।” उन्होंने प्रोबेशनर्स से अपने कर्तव्यों के पालन में दृढ़ रहने को कहा और जोर दिया कि तकनीकी व्यवस्था में किसी तरह की समस्या आने पर भी अधिकारी की जिम्मेदारी और प्रतिबद्धता कमजोर नहीं होनी चाहिए।

तेजी से बदलते तकनीकी और वैज्ञानिक माहौल का जिक्र करते हुए उन्होंने युवा अधिकारियों से अपने ज्ञान और कौशल को लगातार बेहतर बनाने की अपील की। उन्होंने iGOT कर्मयोगी को निरंतर क्षमता निर्माण के लिए महत्वपूर्ण मंच बताया और प्रोबेशनर्स को नए विचारों तथा नवाचार के प्रति खुला नजरिया रखने के लिए प्रोत्साहित किया।

अपने संबोधन में उन्होंने प्रसिद्ध तमिल कवि और दार्शनिक तिरुवल्लुवर का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा का वास्तविक महत्व तभी सामने आता है, जब उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार में दिखाई दे। कानून और प्रक्रियाओं की जानकारी के साथ चरित्र, दयालुता, ईमानदारी और नैतिक आचरण को भी उन्होंने लोक सेवा का जरूरी हिस्सा बताया।

उपराष्ट्रपति ने युवा अधिकारियों को सलाह दी कि वे वरिष्ठों के मार्गदर्शन का सम्मान करें, लेकिन अनुचित दबाव से प्रभावित हुए बिना स्वतंत्र रूप से काम करें। उन्होंने फाइलों के समय पर निपटारे को भी प्रशासनिक जिम्मेदारी का अहम हिस्सा बताया।

उन्होंने कहा कि ‘विकसित भारत @2047’ के लक्ष्य को हासिल करने में सिविल सेवकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। खासकर समावेशी विकास और शासन को अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में प्रशासनिक अधिकारियों की जिम्मेदारी अहम रहेगी।

कार्यक्रम में रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और इंडियन डिफेंस एस्टेट्स सर्विस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।