भारत में स्वदेशी बहु-गैस सेंसर तकनीक को बढ़ावा, TDB देगा 37.51 करोड़ रुपये की सहायता

Tue 29-Sep-2026,11:08 PM IST +05:30

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भारत में स्वदेशी बहु-गैस सेंसर तकनीक को बढ़ावा, TDB देगा 37.51 करोड़ रुपये की सहायता Nagpur Technology
  • TDB ने मल्टी नैनो सेंस को 37.51 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने के लिए समझौता किया।

  • MEMS और AFE SoC आधारित बहु-गैस सेंसर प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा।

  • तकनीक का उपयोग औद्योगिक सुरक्षा, हाइड्रोजन और ऊर्जा क्षेत्र में संभावित रूप से हो सकता है।

Maharashtra / Nagpur :

New Delhi / भारत में औद्योगिक सुरक्षा और हाइड्रोजन जैसी उभरती ऊर्जा तकनीकों के बीच गैसों की तेज और सटीक पहचान की जरूरत लगातार बढ़ रही है। इसी दिशा में स्वदेशी सेंसर तकनीक को बढ़ावा देने के लिए विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (TDB) ने महाराष्ट्र के नागपुर स्थित मेसर्स मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक अहम समझौता किया है।

इस समझौते के तहत कंपनी को 37.51 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। यह सहायता अनुसंधान, विकास और नवाचार यानी RDI फंड के अंतर्गत प्रदान की जाएगी। पूरी परियोजना की स्वीकृत लागत 75.02 करोड़ रुपये है। इसका मकसद एक ऐसे अत्याधुनिक MEMS + AFE SoC बहु-गैस सेंसर प्लेटफॉर्म को विकसित करना है, जिसे मौजूदा तकनीकी स्तर यानी TRL-4 से TRL-9 तक ले जाया जा सके। वित्तीय सहायता ऑल्टरनेटिवली कन्वर्टिबल डिबेंचर यानी OCD के माध्यम से दी जाएगी।

मल्टी नैनो सेंस पहले से ही स्वदेशी MEMS TCDIR गैस सेंसर और CMOS AFE SoC प्लेटफॉर्म विकसित कर रही है। इस तकनीक का उद्देश्य एक छोटे और कॉम्पैक्ट सिस्टम में कई तरह की गैसों की विश्वसनीय पहचान और निगरानी करना है। सेंसर तकनीक में MEMS आधारित संवेदन तत्व को एप्लिकेशन-स्पेसिफिक फ्रंट-एंड सिस्टम-ऑन-चिप के साथ जोड़ा गया है।

इस प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल केवल गैस रिसाव का पता लगाने तक सीमित नहीं रहेगा। इसे प्रोसेस कंट्रोल, स्वास्थ्य और सुरक्षा निगरानी जैसे क्षेत्रों के लिए भी विकसित किया जा रहा है। इसके संभावित उपयोग रिफाइनरी, पेट्रोकेमिकल उद्योग, बिजली क्षेत्र, PNG इंफ्रास्ट्रक्चर, औद्योगिक सुरक्षा, बैटरी और हाइड्रोजन अर्थव्यवस्था जैसे क्षेत्रों में हो सकते हैं।

इस सेंसर की खासियत इसकी डिजाइन में भी है। इसे उच्च संवेदनशीलता, कम बिजली खपत, छोटे आकार और स्मार्ट सिग्नल प्रोसेसिंग को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। सेंसर को व्यापक तापमान सीमा और चुनौतीपूर्ण औद्योगिक वातावरण में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।

इसके अलावा, प्लेटफॉर्म में ऑटोमैटिक कैलिब्रेशन, पर्यावरणीय परिस्थितियों के अनुसार क्षतिपूर्ति और सॉफ्टवेयर आधारित गैस लाइब्रेरी प्रोसेसिंग जैसी सुविधाएं शामिल होंगी। इसका लक्षित प्रतिक्रिया समय 200 मिलीसेकंड से कम रखा गया है। यानी जिन जगहों पर गैस का तेजी से पता लगाना जरूरी है, वहां यह तकनीक उपयोगी हो सकती है।

सेंसर पैकेज का आकार भी काफी कॉम्पैक्ट रखने की योजना है। इसका आकार 25 मिलीमीटर × 25 मिलीमीटर × 15 मिलीमीटर से कम होगा। इससे बैटरी से चलने वाले उपकरणों और एम्बेडेड सिस्टम में इसके इस्तेमाल की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।

RDI फंड के तहत मिलने वाली सहायता से कंपनी सेंसर और AFE SoC प्लेटफॉर्म के विकास, एकीकरण, परीक्षण, सत्यापन और स्केल-अप पर काम कर सकेगी। परियोजना का अंतिम लक्ष्य तकनीक को TRL-9 तक पहुंचाना है, यानी इसे व्यापक व्यावहारिक और वाणिज्यिक उपयोग के लिए तैयार करना।

यह परियोजना डीप-टेक्नोलॉजी क्षेत्र से जुड़ी है, जिसमें क्वांटम टेक्नोलॉजी को उप-क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। हालांकि इसका तत्काल फोकस बहु-गैस संवेदन पर है, लेकिन इसके पीछे MEMS, सेमीकंडक्टर इलेक्ट्रॉनिक्स और इंटेलिजेंट सेंसिंग जैसी तकनीकों का एकीकरण है।

TDB के सचिव राजेश कुमार पाठक ने कहा कि सेंसर आधुनिक तकनीकी प्रणालियों की आधारशिला हैं और औद्योगिक प्रतिस्पर्धा के साथ रणनीतिक आत्मनिर्भरता के लिए स्वदेशी सेंसर और सेमीकंडक्टर क्षमताएं जरूरी हैं। उनके अनुसार, RDI फंड ऐसी तकनीकों को विकास के चरण से बड़े पैमाने पर उत्पादन और बाजार तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

वहीं, मल्टी नैनो सेंस टेक्नोलॉजीज के प्रतिनिधि ने कहा कि TDB की सहायता से कंपनी अपनी MEMS गैस-सेंसिंग तकनीक को एकीकरण, सत्यापन और बड़े पैमाने पर उत्पादन के अगले चरण तक ले जा सकेगी। कंपनी का लक्ष्य कम बिजली खपत वाला, कॉम्पैक्ट और व्यापक उपयोग वाला बहु-गैस सेंसर प्लेटफॉर्म तैयार करना है।

कुल मिलाकर, यह परियोजना भारत में स्वदेशी सेंसर, MEMS और सेमीकंडक्टर आधारित तकनीकों को औद्योगिक उपयोग तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण विकास के रूप में सामने आती है।