चीनी कारों पर यूरोप का 15% कोटा प्लान, क्या बदलेगा ऑटो बाजार?

Wed 23-Sep-2026,04:12 PM IST +05:30

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चीनी कारों पर यूरोप का 15% कोटा प्लान, क्या बदलेगा ऑटो बाजार? Chinese Cars Europe
  • यूरोपीय संघ चीन की प्लग-इन हाइब्रिड कारों पर 15% कोटा लगाने पर विचार कर रहा है।

  • चीनी इलेक्ट्रिक वाहनों पर यूरोप पहले से अतिरिक्त शुल्क लागू कर चुका है।

  • BYD समेत चीनी कंपनियां यूरोप में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की तैयारी में हैं।

Delhi / New Delhi :

यूरोप के ऑटोमोबाइल बाजार में चीनी कार कंपनियों की बढ़ती मौजूदगी अब यूरोपीय संघ के लिए बड़ी व्यापारिक चुनौती बनती जा रही है। चीन में निर्मित कारों, खासकर प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की बढ़ती बिक्री को देखते हुए यूरोपीय संघ बीजिंग से इनके आयात को यूरोपीय बाजार के करीब 15 प्रतिशत तक सीमित करने की मांग कर रहा है। यह प्रस्ताव अतिरिक्त टैरिफ लगाने के बजाय बातचीत के जरिए व्यापार संतुलन बनाने की कोशिश का हिस्सा बताया जा रहा है।

चीनी कारों पर यूरोप की नई रणनीति
यूरोप में BYD, MG और Chery जैसी चीनी कंपनियों की कारों की मौजूदगी लगातार बढ़ी है। दूसरी ओर Volkswagen और Renault जैसे पारंपरिक यूरोपीय वाहन निर्माता चीन की कंपनियों से बढ़ती प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। ऐसे में ब्रसेल्स चीन से प्लग-इन हाइब्रिड कारों के निर्यात को सीमित करने की कोशिश कर रहा है।

इस प्रस्ताव की तुलना 1980 के दशक में जापान के साथ यूरोप की व्यापारिक रणनीति से की जा रही है। वर्ष 1986 में जापान ने यूरोप को कारों के निर्यात पर स्वैच्छिक सीमा स्वीकार की थी। इसके बाद जापानी कंपनियों ने यूरोप में ही उत्पादन संयंत्र लगाने शुरू किए थे। हालांकि, मौजूदा प्रस्ताव का असर उस समय की तुलना में सीमित माना जा रहा है, क्योंकि अभी चर्चा मुख्य रूप से प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों तक सीमित है।

क्या 15 प्रतिशत की सीमा से बड़ा असर पड़ेगा?
Reuters Breakingviews के मुताबिक, जनवरी से जून के बीच यूरोप में करीब 60 लाख नई कारों की खरीद हुई, जिनमें प्लग-इन हाइब्रिड वाहनों की हिस्सेदारी लगभग दस प्रतिशत थी। ऐसे में 15 प्रतिशत की सीमा लागू होने पर बिक्री में कमी का असर सीमित रह सकता है। हालांकि, यूरोपीय संघ की रणनीति केवल एक कोटे तक सीमित नहीं है।

चीन में बनी बैटरी इलेक्ट्रिक कारों पर यूरोपीय संघ पहले ही अतिरिक्त शुल्क लगा चुका है। इसके अलावा इलेक्ट्रिक वाहनों में स्थानीय सामग्री के इस्तेमाल से जुड़े नियमों को भी सख्त करने की दिशा में काम हो रहा है। इसमें बैटरी, पावरट्रेन और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जैसे महत्वपूर्ण हिस्से शामिल हैं।

चीन के सामने भी चुनौती
चीन ने यूरोप की इस योजना का विरोध किया है। चीनी अधिकारियों ने व्यापारिक विवादों का समाधान बातचीत और आपसी सहमति से करने की बात कही है। चीन के वाणिज्य मंत्री वांग वेन्ताओ ने यूरोपीय देशों के साथ ऑटो सेक्टर में सहयोग और निवेश बढ़ाने की इच्छा जताई है, लेकिन उन्होंने संरक्षणवादी नीतियों को लेकर चिंता भी जाहिर की है।

दिलचस्प बात यह है कि चीनी वाहन कंपनियां अब यूरोप में स्थानीय उत्पादन बढ़ाने की तैयारी कर रही हैं। 2023 के बाद से चीनी कंपनियों ने यूरोप में कई उत्पादन परियोजनाओं की घोषणा की है। BYD समेत कुछ कंपनियां नए कारखानों के लिए संभावित जगहों की तलाश कर रही हैं। इसका मतलब यह हो सकता है कि आयात पर प्रतिबंध बढ़ने के साथ चीन की कंपनियां यूरोप के अंदर ही उत्पादन बढ़ाने की रणनीति अपनाएं।

यूरोपीय कंपनियों पर दबाव
यूरोप की पारंपरिक कार कंपनियां पहले से ही दबाव में हैं। Volkswagen ने हाल ही में अपने मुनाफे के लक्ष्य को घटाया है। चीन में कमजोर बिक्री और Porsche से जुड़ी चुनौतियों ने कंपनी पर अतिरिक्त दबाव बढ़ाया है। दूसरी ओर चीनी कंपनियां कीमत, तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहन बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं।

ऐसे में यूरोपीय संघ के सामने चुनौती केवल चीनी कारों के आयात को रोकने की नहीं, बल्कि अपने ऑटो उद्योग की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बनाए रखने की भी है। आने वाले समय में यदि आयात सीमा, टैरिफ और स्थानीय उत्पादन नियम एक साथ आगे बढ़ते हैं, तो यूरोप और चीन के बीच ऑटो सेक्टर में व्यापारिक समीकरण तेजी से बदल सकते हैं।