CGPSC भर्ती घोटाला: CBI की फाइनल चार्जशीट

Sat 03-Jan-2026,03:58 PM IST +05:30

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CGPSC भर्ती घोटाला: CBI की फाइनल चार्जशीट CGPSC-Bharti-Ghotala-CBI-final-Chargesheet
  • CGPSC भर्ती घोटाले में CBI ने 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल कर पूर्व अध्यक्ष सहित 13 आरोपियों को नामजद किया।

  • 2021 की 171 पदों की भर्ती में पारदर्शिता के उल्लंघन और प्रभावशाली उम्मीदवारों को लाभ पहुंचाने के गंभीर आरोप सामने आए।

Chhattisgarh / Raipur :

RAIPUR/ छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) भर्ती घोटाले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार को स्पेशल कोर्ट में करीब 400 पन्नों की फाइनल चार्जशीट दाखिल कर दी। इस चार्जशीट में CGPSC के तत्कालीन अध्यक्ष, सचिव, परीक्षा नियंत्रक समेत कुल 13 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच एजेंसी के अनुसार, यह घोटाला भर्ती प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को गंभीर रूप से प्रभावित करने वाला था।

CBI की चार्जशीट में उत्कर्ष चंद्राकर को अंतिम आरोपी के रूप में शामिल किया गया है। इसके अलावा, भर्ती परीक्षा से जुड़े 29 अभ्यर्थियों को गवाह बनाया गया है, जिनके बयानों से जांच को निर्णायक दिशा मिली। जांच में सामने आया है कि चयन प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए योजनाबद्ध तरीके से नियमों की अनदेखी की गई।

चार्जशीट के अनुसार, बार नवापारा को जानबूझकर परीक्षा केंद्र बनाया गया, ताकि भर्ती प्रक्रिया पर नियंत्रण रखा जा सके। आरोप है कि परीक्षार्थियों के ठहरने के लिए जिस रिसॉर्ट की व्यवस्था की गई थी, वह उत्कर्ष चंद्राकर द्वारा कराई गई थी। इसी स्थान का कथित तौर पर अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए उपयोग किया गया।

CBI द्वारा नामजद प्रमुख आरोपियों में टामन सोनवानी (तत्कालीन अध्यक्ष, CGPSC), जीवन किशोर ध्रुव (तत्कालीन सचिव), आरती वासनिक (परीक्षा नियंत्रक), श्रवण कुमार गोयल, नितेश सोनवानी, शशांक गोयल, भूमिका कटारिया, साहिल सोनवानी, ललित गणवीर, मीशा कोसले, दीप आदिल और उत्कर्ष चंद्राकर शामिल हैं।

यह भर्ती प्रक्रिया वर्ष 2021 में 171 पदों के लिए आयोजित की गई थी। प्री परीक्षा 13 फरवरी 2022 को हुई, जिसमें 2565 अभ्यर्थी सफल हुए। इसके बाद मई 2022 में मेंस परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 509 उम्मीदवार उत्तीर्ण हुए। अंतिम चयन सूची 11 मई 2023 को जारी हुई, जिसमें 170 अभ्यर्थियों का चयन किया गया।

CGPSC भर्ती घोटाला 2020 से 2022 के बीच आयोजित परीक्षाओं और इंटरव्यू से जुड़ा है। आरोप है कि राजनीतिक और प्रशासनिक प्रभाव के चलते योग्य उम्मीदवारों को पीछे छोड़कर पसंदीदा अभ्यर्थियों का चयन किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार ने जांच CBI को सौंपी थी।