JPSC मेधा घोटाला: CID ने तीन और दलाल किए गिरफ्तार, अब तक 14 आरोपी गिरफ्त में

Tue 04-Aug-2026,11:25 PM IST +05:30

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JPSC मेधा घोटाला: CID ने तीन और दलाल किए गिरफ्तार, अब तक 14 आरोपी गिरफ्त में JPSC मेधा घोटाला
  • JPSC मेधा घोटाले में CID ने तीन और कथित दलालों को गिरफ्तार किया।

  •  डिजिटल साक्ष्य, OMR शीट, मार्कशीट और दस्तावेज बरामद।

  • मामले में अब तक 14 आरोपी गिरफ्तार, जांच लगातार जारी।

Jharkhand / Ranchi :

Ranchi / झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) मेधा घोटाला मामले की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) को बड़ी सफलता मिली है। सूत्रों के अनुसार, मंगलवार देर रात सीआईडी ने तीन कथित दलालों (सोर्स एजेंट) उमेश कुमार, बुद्धेश्वर भगत और रमेश कुमार को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का दावा है कि ये एजेंट अभ्यर्थियों से संपर्क कर उनके दस्तावेज इकट्ठा करते थे, उनसे पैसे वसूलते थे और परीक्षा संचालित करने वाली एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) तक अपने नेटवर्क के जरिए पहुंचाते थे।

जांच में सामने आया है कि इन तीनों एजेंटों के टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह और मार्केटिंग मैनेजर अभय कुमार तिवारी से करीबी संबंध थे। सीआईडी को इन दलालों की जानकारी टीडीपीएल के अधिकारियों से रिमांड के दौरान हुई पूछताछ में मिली। इसके बाद इंटर-स्टेट लिंकेज के आधार पर कार्रवाई करते हुए तीनों को रांची से गिरफ्तार कर लिया गया।

सीआईडी के अनुसार, आरोपियों के पास से बड़ी मात्रा में डिजिटल और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य बरामद हुए हैं। इनमें परीक्षा में कथित सेटिंग कराने से जुड़े रिकॉर्ड, अभ्यर्थियों की मार्कशीट, ओएमआर शीट, शैक्षणिक प्रमाणपत्र और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि ये साक्ष्य भर्ती परीक्षा में अनियमितताओं के नेटवर्क का खुलासा करने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।

तीनों नई गिरफ्तारियों के साथ इस मामले में अब तक 14 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इससे पहले सीआईडी ने जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी तथा दोनों तकनीकी प्रोग्रामर उस्मान और एबाद सहित कुल 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया था।

गौरतलब है कि सीआईडी ने 22 जुलाई 2026 को इस मामले में सीआईडी थाना कांड संख्या 16/2026 के तहत प्राथमिकी दर्ज की थी। इसके बाद से जांच लगातार आगे बढ़ रही है और नए साक्ष्य सामने आ रहे हैं। जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने, अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच करने और यह पता लगाने में जुटी है कि कथित अनियमितताओं का दायरा कितना व्यापक था। मामले में आगे भी कई और गिरफ्तारियां होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।