SAF बटालियन घोटाला: TA बिलों से 3.5 करोड़ की हेराफेरी
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फाइनेंशियल इंटेलिजेंस जांच में संदिग्ध बैंक लेन-देन उजागर, दो आरोपी गिरफ्तार और 11 जवान जांच के दायरे में।
घोटाले से जुड़े एक आरक्षक की आत्महत्या ने मामले को और संवेदनशील बनाया, जांच एजेंसियां हर एंगल से कर रहीं पड़ताल।
Madhya Pradesh/ मध्यप्रदेश की विशेष सशस्त्र बल (SAF) की छठवीं बटालियन में करोड़ों के घोटाले का खुलासा होने से पुलिस और प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है। जबलपुर स्थित इस बटालियन में यात्रा भत्ता (TA) बिलों के जरिए करीब 3.5 करोड़ रुपये की हेराफेरी सामने आई है। मामले में दो करीबी दोस्तों पर सरकारी खजाने को चूना लगाने का आरोप है, वहीं एक जवान की आत्महत्या ने इस पूरे प्रकरण को और भी संवेदनशील बना दिया है।
3.5 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा कैसे हुआ:
जानकारी के मुताबिक, थाना रांझी क्षेत्र में स्थित एसएएफ की छठवीं बटालियन में पदस्थ एएसआई सत्यम शर्मा और आरक्षक अभिषेक ने मिलकर एक सुनियोजित साजिश रची। दोनों पर आरोप है कि उन्होंने फर्जी यात्रा भत्ता बिल तैयार कर उन्हें विभागीय रिकॉर्ड में दर्शाया और करोड़ों रुपये का भुगतान अपने व सहयोगियों के खातों में करा लिया। प्रारंभिक जांच में यह राशि लगभग साढ़े तीन करोड़ रुपये बताई जा रही है, जो समय-समय पर छोटे भुगतानों के रूप में निकाली गई।
फाइनेंशियल इंटेलिजेंस से हुआ खुलासा:
यह घोटाला तब सामने आया जब फाइनेंशियल इंटेलिजेंस यूनिट ने बैंक खातों में असामान्य और संदिग्ध लेन-देन की पहचान की। जांच में पाया गया कि कई खातों में नियमित वेतन से कहीं अधिक रकम जमा हो रही थी। इसके बाद विभाग को अलर्ट किया गया, जिसके आधार पर आंतरिक जांच शुरू हुई और दोनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई।
11 जवान जांच के घेरे में:
जांच एजेंसियों का कहना है कि यह घोटाला सिर्फ दो लोगों तक सीमित नहीं हो सकता। शुरुआती पड़ताल में करीब 11 अन्य जवानों की भूमिका भी संदेह के दायरे में आई है। माना जा रहा है कि फर्जी बिल पास कराने और रकम के ट्रांजैक्शन में इनकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भागीदारी हो सकती है। सभी संदिग्धों के बैंक रिकॉर्ड और सेवा दस्तावेजों की जांच की जा रही है।
आत्महत्या से बढ़ी गंभीरता:
मामले से जुड़े एक आरक्षक ने कथित तौर पर मानसिक दबाव और पूछताछ के डर से आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है और जांच एजेंसियां अब इस एंगल से भी मामले की पड़ताल कर रही हैं कि कहीं घोटाले से जुड़ा दबाव इसकी वजह तो नहीं बना।
सख्त कार्रवाई के संकेत:
वरिष्ठ अधिकारियों ने साफ किया है कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा। पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा रही है और जरूरत पड़ने पर और गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।