राजनाथ सिंह ने माउंट एकोनकागुआ अभियान को दिखाई हरी झंडी
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रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अर्जेंटीना के माउंट एकोनकागुआ के लिए भारतीय संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को नई दिल्ली से रवाना किया।
नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और जवाहर पर्वतारोहण संस्थान द्वारा संचालित अभियान, नेतृत्व, टीम वर्क और मानसिक दृढ़ता की परीक्षा।
New Delhi/ रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 5 फरवरी 2026 को नई दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक से अर्जेंटीना के माउंट एकोनकागुआ के लिए एक संयुक्त पर्वतारोहण अभियान को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। 6,961 मीटर ऊंचा माउंट एकोनकागुआ दक्षिण अमेरिका की सबसे ऊंची चोटी और एशिया के बाहर का सर्वोच्च पर्वत है। यह अभियान भारत की साहसिक क्षमताओं और पर्वतारोहण प्रशिक्षण की वैश्विक पहचान को दर्शाता है।
यह संयुक्त अभियान नेहरू पर्वतारोहण संस्थान (एनआईएम), उत्तरकाशी और जवाहर पर्वतारोहण एवं शीतकालीन खेल संस्थान (जेआईएम एंड डब्ल्यूएस), पहलगाम द्वारा संचालित किया जा रहा है। रक्षा मंत्री ने दोनों संस्थानों की सराहना करते हुए कहा कि ये संस्थान देश के कर्मियों को साहस, दृढ़ता और संकल्प के साथ कठिन परिस्थितियों का सामना करने के लिए तैयार करते हैं।
टीम को शुभकामनाएं देते हुए श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि माउंट एकोनकागुआ जैसी दुर्गम चोटी पर चढ़ाई केवल शारीरिक क्षमता की परीक्षा नहीं होती, बल्कि यह नेतृत्व, टीम वर्क और मानसिक दृढ़ता का भी वास्तविक परीक्षण है। उन्होंने विश्वास जताया कि यह दल सफलतापूर्वक अभियान पूरा कर देश का नाम रोशन करेगा।
इस छह सदस्यीय दल में उच्च प्रशिक्षित और अनुभवी पर्वतारोहण प्रशिक्षक शामिल हैं। दल का नेतृत्व कर्नल हेम चंद्र सिंह कर रहे हैं। अन्य सदस्यों में कैप्टन जी संतोष कुमार, श्री दीप बहादुर साही, श्री विनोद गुसैन, नायब सिपाही भूपिंदर सिंह और हवलदार रमेश कुमार शामिल हैं। यह अभियान 6 फरवरी 2026 को शुरू होगा और इसके महीने के अंत तक पूर्ण होने की संभावना है।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान के दौरान प्राप्त अनुभव, तकनीकी ज्ञान और आत्मविश्वास का उपयोग भविष्य में देशभर के युवाओं, सशस्त्र बलों के कर्मियों और साहसिक गतिविधियों में रुचि रखने वालों के सुरक्षित और प्रभावी प्रशिक्षण में किया जाएगा। इससे भारत में पर्वतारोहण और साहसिक खेलों की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को भी मजबूती मिलेगी।
माउंट एकोनकागुआ अभियान को वैश्विक मंच पर साहसिक गतिविधियों और पर्वतीय अन्वेषण में भारत की बढ़ती उपस्थिति के रूप में देखा जा रहा है। यह अभियान न केवल पर्वतारोहण कौशल का प्रदर्शन है, बल्कि आत्मनिर्भर, आत्मविश्वासी और साहसी भारत की भावना को भी प्रतिबिंबित करता है।