ड्रोन सर्टिफिकेशन में भारत की बड़ी छलांग

Wed 04-Feb-2026,05:56 PM IST +05:30

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ड्रोन सर्टिफिकेशन में भारत की बड़ी छलांग India-Drone-Certification-Nth-STQC-Partnership
  • एनटीएच और एसटीक्यूसी-ईआरटीएल की साझेदारी से भारत में ड्रोन परीक्षण एवं प्रमाणीकरण ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप मजबूती मिली।

  • यह पहल ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विजन 2047’ के तहत भारत को वैश्विक ड्रोन हब बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।

Delhi / New Delhi :

Delhi/ भारत को ड्रोन प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और भरोसेमंद केंद्र बनाने की दिशा में एक अहम कदम उठाया गया है। राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (एनटीएच) ने इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अधीन एसटीक्यूसी निदेशालय की ईआरटीएल (उत्तर) प्रयोगशाला के साथ रणनीतिक साझेदारी की है। यह पहल ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विजन 2047’ के लक्ष्यों को मजबूती देते हुए देश के ड्रोन परीक्षण एवं प्रमाणीकरण ढांचे को नई ऊंचाई प्रदान करेगी।
राष्ट्रीय परीक्षण केंद्र (एनटीएच) ने भारत में ड्रोन परीक्षण और प्रमाणन व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एसटीक्यूसी निदेशालय–इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रीय परीक्षण प्रयोगशाला (उत्तर) [ईआरटीएल (नॉर्थ)] के साथ एक महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग ड्रोन नियम, 2021 और मानवरहित विमान प्रणाली प्रमाणन योजना (सीएसयूएएस), 2022 के तहत आवश्यक नियामक जरूरतों को पूरा करेगा।

यह एमओयू 2 फरवरी 2026 को नई दिल्ली में हस्ताक्षरित किया गया, जिसकी उपस्थिति में उपभोक्ता मामलों की सचिव श्रीमती निधि खरे, एनटीएच के महानिदेशक डॉ. आलोक कुमार श्रीवास्तव, एसटीक्यूसी के वैज्ञानिक ‘जी’ श्री विवेक कश्यप और ईआरटीएल (उत्तर) के निदेशक श्री प्रदीप गुंज्याल मौजूद रहे।

समझौते के तहत ड्रोन और उनके उप-प्रणालियों के लिए विद्युतचुंबकीय व्यतिकरण (ईएमआई) और विद्युतचुंबकीय संगतता (ईएमसी) परीक्षण ईआरटीएल (उत्तर) में आईईसी 61000 और आईएस 14700 मानकों के अनुरूप किए जाएंगे, जबकि अन्य परीक्षण एनटीएच द्वारा अपने परिसर में संपन्न होंगे। इन परीक्षणों की रिपोर्ट को ड्रोन के टाइप सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में सीधे एकीकृत किया जाएगा।

इस सहयोग से विशेष रूप से स्टार्टअप और एमएसएमई को लाभ होगा, जिन्हें अब कम लागत पर पारदर्शी, विश्वसनीय और सरकार समर्थित प्रमाणन प्रक्रिया उपलब्ध होगी। यह पहल उच्च लागत वाली परीक्षण अवसंरचना की अनावश्यक पुनरावृत्ति को रोकते हुए राष्ट्रीय संसाधनों के अधिकतम उपयोग को सुनिश्चित करती है।

इसके अतिरिक्त, यह साझेदारी भारतीय ड्रोनों को आईईसी/आईएसओ, एमआईएल-एसटीडी, एएसटीएम और आरटीसीए जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप प्रमाणित करने में सहायक होगी, जिससे वैश्विक बाजारों में भारतीय ड्रोन उत्पादों की स्वीकार्यता बढ़ेगी।

कम लागत में विश्वस्तरीय परीक्षण और प्रमाणीकरण की सुविधा उपलब्ध होने से कृषि, लॉजिस्टिक्स, स्वास्थ्य सेवाएं, आपदा प्रबंधन, स्मार्ट सिटी और बुनियादी ढांचा निगरानी जैसे क्षेत्रों में ड्रोन आधारित नवाचार को नई गति मिलेगी।

एनटीएच, जिसे डीजीसीए और क्यूसीआई द्वारा सीएसयूएएस के अंतर्गत प्रमाणन निकाय के रूप में मान्यता प्राप्त है, 1912 से भारत सरकार के प्रमुख वैज्ञानिक एवं परीक्षण संस्थान के रूप में कार्य कर रहा है। यह साझेदारी भारत के लिए एक मजबूत, स्वदेशी और भविष्य के लिए तैयार ड्रोन प्रमाणन प्रणाली के निर्माण की दिशा में एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।