मणिपुर को मिला नया नेतृत्व

Wed 04-Feb-2026,06:23 PM IST +05:30

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  • विधायक रहते जहां सैलरी अधिक थी, वहीं मुख्यमंत्री बनने के बाद नकद वेतन घटता है लेकिन सुविधाएं कई गुना बढ़ जाती हैं।

  • युमनाम खेमचंद सिंह के सामने मणिपुर में शांति, प्रशासनिक सुधार और भरोसे की राजनीति सबसे बड़ी चुनौती होगी।

Manipur / Imphal :

Manipur/ मणिपुर पिछले लंबे समय से जातीय हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और प्रशासनिक चुनौतियों के दौर से गुजर रहा है। ऐसे हालात में राज्य को नया नेतृत्व मिलने जा रहा है, जिससे शांति और स्थिरता की उम्मीदें तेज हो गई हैं। भारतीय जनता पार्टी विधायक दल की बैठक में सिंगजामेई से विधायक युमनाम खेमचंद सिंह को सर्वसम्मति से विधायक दल का नेता चुन लिया गया है। इसके साथ ही उनका मुख्यमंत्री बनना लगभग तय माना जा रहा है, जो मणिपुर की राजनीति में एक अहम मोड़ साबित हो सकता है।

युमनाम खेमचंद सिंह का राजनीतिक सफर

युमनाम खेमचंद सिंह मणिपुर की राजनीति में एक अनुभवी और भरोसेमंद चेहरा माने जाते हैं। वे कई बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं और राज्य विधानसभा अध्यक्ष के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। संसदीय कार्यवाही और संगठनात्मक रणनीति दोनों में उनकी मजबूत पकड़ रही है। भाजपा नेतृत्व का मानना है कि मौजूदा संवेदनशील हालात में अनुभव और संतुलित नेतृत्व की आवश्यकता है, जिसे खेमचंद सिंह पूरा कर सकते हैं।

विधायक रहते कितनी मिलती थी सैलरी

विधायक दल का नेता चुने जाने से पहले युमनाम खेमचंद सिंह को एक विधायक के रूप में बेसिक वेतन, निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, सचिवालय भत्ता और अन्य सुविधाओं को मिलाकर लगभग ढाई लाख रुपये प्रतिमाह मिलते थे। इसमें टेलीफोन, कार्यालय, यात्रा और मनोरंजन से जुड़े भत्ते भी शामिल थे।

मुख्यमंत्री बनने के बाद क्यों घटती है नकद सैलरी

आम धारणा के विपरीत, मुख्यमंत्री बनने के बाद नकद वेतन में बढ़ोतरी नहीं होती। नियमों के अनुसार मणिपुर के मुख्यमंत्री को भत्तों सहित लगभग 1.20 लाख से 1.50 लाख रुपये प्रतिमाह मिलते हैं। हालांकि यह कटौती केवल वेतन तक सीमित रहती है, क्योंकि पद के साथ मिलने वाली सुविधाएं कहीं अधिक व्यापक और प्रभावशाली होती हैं।

सुविधाएं जो बनाती हैं मुख्यमंत्री को शक्तिशाली

मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए युमनाम खेमचंद सिंह को सरकारी आवास, आधिकारिक कार्यालय, जेड प्लस सुरक्षा, सरकारी वाहन, प्रशासनिक स्टाफ, असीमित चिकित्सा सुविधाएं और आधिकारिक दौरों के लिए विशेष प्रबंध मिलेंगे। लेकिन असली ताकत इन सुविधाओं से ज्यादा प्रशासनिक नियंत्रण और नीति निर्धारण में निहित होती है।

शांति बहाली पर टिकी निगाहें

अब राज्य की जनता और देश की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नया नेतृत्व मणिपुर में शांति बहाली, विश्वास निर्माण और विकास की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।