छत्तीसगढ़ MARKFED बोर्ड की शक्तियां शशिकांत द्विवेदी को सौंपी गईं
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छानबीन समिति की सिफारिश पर सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 के तहत MARKFED के प्रशासनिक नियंत्रण में बड़ा बदलाव।
एकल प्राधिकरण को बोर्ड शक्तियां मिलने से सहकारी विपणन व्यवस्था और किसानों से जुड़े फैसलों में तेजी की उम्मीद।
Raipur/ छत्तीसगढ़ के सहकारी क्षेत्र में एक अहम प्रशासनिक बदलाव सामने आया है। राज्य की प्रमुख सहकारी संस्था छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ मर्यादित (MARKFED), रायपुर के संचालन को लेकर बड़ा फैसला लिया गया है। सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक, सहकारी संस्थाएं छत्तीसगढ़ ने MARKFED बोर्ड की सभी शक्तियों के संचालन के लिए शशिकांत द्विवेदी को अधिकृत कर दिया है। यह आदेश 3 फरवरी 2026 को जारी किया गया, जिसे सहकारी व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सहकारिता आयुक्त द्वारा जारी आदेश के अनुसार, छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ (MARKFED), रायपुर के बोर्ड की शक्तियों का प्रयोग अब शशिकांत द्विवेदी करेंगे। यह निर्णय छानबीन समिति की अनुशंसा के बाद लिया गया है। समिति की बैठक 3 फरवरी 2026 को आयोजित हुई थी, जिसमें MARKFED बोर्ड की शक्तियों को एकल प्राधिकरण को सौंपने की सिफारिश की गई थी।
छानबीन समिति का गठन छत्तीसगढ़ सहकारी सोसाइटी अधिनियम 1960 की धारा 49(8) तथा सहकारी सोसाइटी नियम 1962 के नियम 43-ख (उप नियम 3) के तहत किया गया था। समिति ने संगठन के वर्तमान हालात और प्रशासनिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए यह अनुशंसा की थी। सहकारिता आयुक्त ने समिति की सिफारिश को स्वीकार करते हुए स्पष्ट किया है कि आगामी आदेश तक शशिकांत द्विवेदी MARKFED बोर्ड की सभी शक्तियों का उपयोग करेंगे। इसके अंतर्गत संस्था से जुड़े प्रशासनिक, संचालनात्मक और नीतिगत निर्णय उनके अधिकार क्षेत्र में रहेंगे।
कानूनी प्रावधानों के तहत जारी इस आदेश में यह भी उल्लेख किया गया है कि विशेष परिस्थितियों में सहकारी संस्थाओं के सुचारु संचालन के लिए सरकार को यह अधिकार प्राप्त है कि वह बोर्ड की शक्तियां किसी अधिकृत अधिकारी को सौंप सके। इस फैसले को उसी अधिकार का प्रयोग माना जा रहा है। MARKFED छत्तीसगढ़ की एक महत्वपूर्ण सहकारी संस्था है, जो किसानों से जुड़ी विपणन व्यवस्था और कृषि उत्पादों के प्रबंधन में अहम भूमिका निभाती है। ऐसे में बोर्ड शक्तियों का एकल संचालन प्रशासनिक स्थिरता और निर्णय प्रक्रिया में तेजी लाने की दिशा में कदम माना जा रहा है।
सहकारी क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि इस निर्णय का असर आने वाले समय में किसानों, सहकारी समितियों और राज्य की विपणन व्यवस्था पर देखने को मिल सकता है। फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि यह व्यवस्था कब तक लागू रहती है और इसके बाद सरकार क्या अगला कदम उठाती है।