गाजियाबाद में तीन बहनों की मौत
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गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों की सामूहिक मौत, डिजिटल एडिक्शन और मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर सवाल।
सुसाइड नोट में के-पॉप संस्कृति, ऑनलाइन दुनिया और पारिवारिक दबाव का उल्लेख, साइबर एंगल से जांच जारी।
Ghaziabad/ उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले से सामने आई एक हृदयविदारक घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। थाना टीला मोड़ क्षेत्र की भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों की सामूहिक मौत ने न सिर्फ परिवार बल्कि समाज को भी गहरे सदमे में डाल दिया है। शुरुआती जांच में यह मामला डिजिटल एडिक्शन, पहचान संकट और मानसिक तनाव से जुड़ा सामने आया है, जिसने आधुनिक दौर की एक गंभीर सामाजिक चुनौती को उजागर किया है।
पुलिस के अनुसार, मृतक बहनें प्राची, पाखी और निशिका ने सोसाइटी की ऊंची मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी। घटना स्थल से पुलिस को एक पॉकेट डायरी मिली है, जिसमें आठ पन्नों का सुसाइड नोट लिखा हुआ है। इस नोट में बहनों ने अपने पिता से माफी मांगते हुए लिखा कि वे मानसिक रूप से खुद को कोरियाई संस्कृति से जुड़ा हुआ महसूस करती थीं और भारतीय सामाजिक ढांचे में खुद को स्वीकार नहीं कर पा रही थीं।
डायरी में उल्लेख किया गया है कि परिवार द्वारा विवाह जैसे विषयों पर बातचीत शुरू किए जाने के बाद उनका मानसिक दबाव और बढ़ गया। बहनों ने यह भी लिखा कि वे वास्तविक दुनिया की तुलना में के-पॉप कलाकारों और विदेशी डिजिटल कंटेंट से अधिक जुड़ाव महसूस करती थीं। उनका मानना था कि वे अपने परिवार से भावनात्मक रूप से दूर होती जा रही थीं। जांच में सामने आया है कि तीनों बहनें कोरियन ड्रामा, विदेशी संगीत, एनीमेशन कैरेक्टर, मोबाइल गेम्स और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अत्यधिक समय बिताती थीं। सुसाइड नोट में कई ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स और डिजिटल माध्यमों का भी उल्लेख किया गया है, जिससे उनके गहरे ऑनलाइन जुड़ाव का संकेत मिलता है।
घटना के बाद पुलिस ने तीनों के मोबाइल फोन और लैपटॉप जब्त कर लिए हैं। साइबर सेल यह जांच कर रही है कि कहीं वे किसी ऑनलाइन ग्रुप, मानसिक दबाव, उकसावे या डिजिटल शोषण का शिकार तो नहीं हुईं। फिलहाल सुसाइड नोट में किसी व्यक्ति को सीधे जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है। इस दर्दनाक घटना के बाद परिवार पूरी तरह टूट चुका है। सोसाइटी और आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि किसी ने भी यह कल्पना नहीं की थी कि डिजिटल दुनिया से जुड़ाव इतना भयावह रूप ले सकता है।
मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों और युवाओं में बढ़ती स्क्रीन-डिपेंडेंसी, सामाजिक अलगाव और पहचान का संकट एक गंभीर समस्या बनता जा रहा है। विशेषज्ञों ने अभिभावकों को सलाह दी है कि वे बच्चों से संवाद बनाए रखें और उनकी ऑनलाइन गतिविधियों को समझने की कोशिश करें, ताकि समय रहते ऐसे संकेतों को पहचाना जा सके।