नेपाल बाढ़ पर PM बालेन शाह की अपील, कर्ज नहीं अनुदान आधारित मदद क्यों?
ताजा खबरों से अपडेट रहने के लिए हमारे Whatsapp Channel को Join करें |
Nepal Glacier Flood
PM बालेन्द्र शाह ने बाढ़ पुनर्निर्माण के लिए अनुदान आधारित मदद मांगी।
नेपाल की रिकवरी जरूरतें GDP के करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच सकती हैं।
भारत-चीन के साथ हिमालयी जलवायु सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया गया।
Kathmandu / हिमालयी देश नेपाल अभी उस विनाशकारी बाढ़ से उबर नहीं पाया है, जिसने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी। सड़कें, पुल और घर बहने के बाद अब पुनर्निर्माण की चुनौती सामने है। ऐसे में प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया से मदद मांगी है। लेकिन नेपाल को इस बार कर्ज नहीं, अनुदान आधारित सहायता चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र में मदद की अपील
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने गुरुवार को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अनुदान आधारित वित्तीय सहायता देने की अपील की। उनका कहना था कि जलवायु परिवर्तन से प्रभावित गरीब देशों को आपदा के बाद पुनर्निर्माण के लिए और अधिक कर्ज के बोझ में नहीं धकेला जाना चाहिए।
शाह के मुताबिक, हालिया ग्लेशियर बाढ़ के बाद नेपाल की रिकवरी और पुनर्निर्माण की जरूरतें देश के सकल घरेलू उत्पाद यानी GDP के करीब 10 प्रतिशत तक पहुंच सकती हैं। उनका कहना है कि इतनी बड़ी तबाही के बाद केवल बड़े कर्ज या छोटी-छोटी सहायता राशि से समस्या का समाधान नहीं होगा।
1,450 से ज्यादा लोगों की मौत
अगस्त के आखिर में आई इस भयावह बाढ़ ने नेपाल के पहाड़ी इलाकों में भारी तबाही मचाई। रिपोर्ट के अनुसार इस आपदा में कम से कम 1,450 लोगों की मौत हो चुकी है। बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं और खोज एवं बचाव अभियान जारी है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार 26 अगस्त की बाढ़ ने उत्तरी नेपाल के कई इलाकों में घरों, सड़कों, बिजली और पानी की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया। बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित लोगों के लिए संयुक्त राष्ट्र और सहयोगी एजेंसियों ने पहले ही लगभग 49.6 मिलियन डॉलर की आपात अपील शुरू की थी।
भारत और चीन के साथ सहयोग पर जोर
प्रधानमंत्री शाह ने नेपाल, भारत और चीन के बीच जलवायु आपदा से निपटने के लिए ज्यादा सहयोग की जरूरत बताई। उन्होंने हिमालयी क्षेत्र के लिए एक साझा तंत्र विकसित करने की बात कही, जिसमें उपग्रह से मिलने वाले आंकड़ों को साझा करना, ग्लेशियल झीलों की निगरानी, शुरुआती चेतावनी प्रणाली को मजबूत करना और सीमा पार आपदा प्रतिक्रिया के बीच बेहतर तालमेल शामिल हो।
उनका कहना है कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन से जुड़े खतरे किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। ऐसे में क्षेत्रीय स्तर पर जानकारी और संसाधनों का साझा इस्तेमाल आपदा से होने वाले नुकसान को कम करने में मदद कर सकता है।
विकास की रफ्तार पर पड़ा असर
शाह ने कहा कि बाढ़ ने नेपाल की विकास यात्रा को भी प्रभावित किया है। कई इलाकों में सड़कें, पुल, स्कूल, घर और लोगों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित हुई है। पहाड़ों में ग्लेशियर से जुड़ी घटना के बाद भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ ने निचले क्षेत्रों में भारी तबाही मचाई।
विश्व बैंक ने भी नेपाल के लिए आपात वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई है। संयुक्त राष्ट्र और अन्य एजेंसियां राहत, स्वास्थ्य, भोजन, स्वच्छ पानी और प्रभावित परिवारों की आजीविका बहाल करने के प्रयासों में जुटी हैं।
नेपाल के सामने अब राहत के साथ-साथ लंबे समय तक चलने वाले पुनर्निर्माण की चुनौती है। प्रधानमंत्री शाह की अपील से साफ है कि काठमांडू इस प्रक्रिया में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की ऐसी मदद चाहता है, जिससे देश पर नए कर्ज का बोझ बढ़ने के बजाय प्रभावित क्षेत्रों को स्थायी रूप से फिर से खड़ा किया जा सके।