राष्ट्रपति मुर्मु ने किया ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस का उद्घाटन, युवाओं पर जोर

Wed 23-Sep-2026,11:18 PM IST +05:30

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राष्ट्रपति मुर्मु ने किया ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस का उद्घाटन, युवाओं पर जोर Spiritual Development
  • राष्ट्रपति मुर्मु ने वडोदरा में ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस का उद्घाटन किया।

  • राष्ट्रपति ने आर्थिक विकास के साथ मानवीय विकास पर जोर दिया।

  • युवाओं में आंतरिक शक्ति और सकारात्मक सोच को राष्ट्र निर्माण से जोड़ा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / क्या केवल आर्थिक विकास से देश की तरक्की पूरी हो सकती है? राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने गुजरात के वडोदरा में आध्यात्मिक जागरण के कार्यक्रम में इसी सवाल की ओर ध्यान खींचा। उन्होंने शिक्षा, आत्म-नियंत्रण, प्रकृति और युवा शक्ति को नए भारत की नींव बताया।

भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने बुधवार, 23 सितंबर 2026 को गुजरात के वडोदरा में ब्रह्माकुमारीज के कार्यक्रम ‘विश्व नवीनीकरण के लिए आध्यात्मिक जागरण’ का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने ‘ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस’ रिट्रीट सेंटर का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में राष्ट्रपति ने नडियाद से जुड़े युवाओं के एक विशेष कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ किया, जिसका विषय ‘विकसित भारत के लिए युवा: राष्ट्र निर्माण के लिए आंतरिक शक्ति की जागृति’ रखा गया।

आर्थिक विकास के साथ मानवीय विकास जरूरी
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि आज देश को केवल आर्थिक विकास की नहीं, बल्कि मानवीय विकास की भी आवश्यकता है। उनके अनुसार ऐसी शिक्षा जरूरी है जो सिर्फ बुद्धि का विकास न करे, बल्कि व्यक्ति के भीतर विवेक को भी जागृत करे।

उन्होंने कहा कि विकास ऐसा होना चाहिए जिसमें प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता बनी रहे। शक्ति का अर्थ दूसरों पर नियंत्रण करना नहीं, बल्कि स्वयं पर नियंत्रण रखना होना चाहिए। राष्ट्रपति ने ऐसी आध्यात्मिकता की आवश्यकता पर भी जोर दिया जो लोगों के बीच दूरी कम करे और उन्हें एक-दूसरे से जोड़ने का काम करे।

राष्ट्रपति ने ब्रह्माकुमारीज के ध्यान और आध्यात्मिक ज्ञान के माध्यम से व्यक्तिगत परिवर्तन तथा विश्व नवीनीकरण के संदेश को भारत के साथ-साथ कई देशों तक पहुंचाने की सराहना की।

बदलाव की शुरुआत व्यक्ति से
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि हर व्यक्ति के भीतर परिवर्तन की संभावना मौजूद रहती है। यदि किसी इंसान के भीतर यह विश्वास पैदा हो जाए कि विचारों और कर्मों में बदलाव से उसका जीवन बदला जा सकता है, तो उसके भीतर आशा और आत्मसम्मान मजबूत हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे व्यक्तिगत बदलाव का प्रभाव केवल संबंधित व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता, बल्कि परिवार और समाज में भी सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन सकता है।

राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि ग्लोबल स्पिरिचुअल पैलेस आने वाले समय में ऐसा स्थान बनेगा, जहां समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शांति और सद्भाव के साथ एक-दूसरे से जुड़ सकेंगे।

युवाओं की आंतरिक शक्ति पर जोर
राष्ट्रपति ने नडियाद में आयोजित ‘विकसित भारत के लिए युवा’ कार्यक्रम का वर्चुअल शुभारंभ करते हुए कहा कि युवाओं के विचार, भावनाएं और कर्म जब सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ते हैं, तो उसका असर परिवार, कार्यस्थल, समुदाय और अंततः पूरे देश पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के भीतर आंतरिक शक्ति का जागरण केवल व्यक्तिगत विकास का विषय नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया से भी जुड़ा है। युवाओं को आत्मनिर्भर, शांतिपूर्ण और जिम्मेदार बनाने की जिम्मेदारी समाज के सभी वर्गों की है।

आत्म-परिवर्तन से समाज परिवर्तन
राष्ट्रपति ने कहा कि भारतीय परंपरा में आत्म-परिवर्तन को समाज परिवर्तन का आधार माना गया है। जरूरत इस बात की है कि इस विरासत को आज की जीवनशैली और आधुनिक जरूरतों के साथ जोड़ा जाए।

उन्होंने ऐसे भारत के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया जो आर्थिक रूप से समृद्ध होने के साथ वैज्ञानिक रूप से उन्नत, सामाजिक रूप से समावेशी और आध्यात्मिक रूप से जागृत हो। वडोदरा का यह कार्यक्रम इसी व्यापक सोच में व्यक्तिगत विकास, युवा शक्ति और सामाजिक सद्भाव को जोड़ने का संदेश देता है।