‘मन की बात’ में PM मोदी के बड़े संदेश! आतंकवाद, जनगणना और नशामुक्ति पर क्या बोले?

Sun 27-Sep-2026,01:04 PM IST +05:30

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‘मन की बात’ में PM मोदी के बड़े संदेश! आतंकवाद, जनगणना और नशामुक्ति पर क्या बोले? Man Ki Baat
  • PM मोदी ने सर्जिकल स्ट्राइक और आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति का उल्लेख किया।

  • जनगणना में नागरिकों की भागीदारी और डिजिटल स्व-गणना पर जोर दिया।

  • नशामुक्ति, पर्यावरण, पोषण, खेल और स्थानीय उत्पादों से जुड़े प्रयासों को सराहा।

Delhi / New Delhi :

New Delhi / एक ही संदेश में आतंकवाद से लेकर जनगणना, विरासत, पर्यावरण, नशामुक्ति और किसानों की कमाई तक कई बड़े मुद्दे सामने आए। प्रधानमंत्री के संबोधन में ऐसे कौन से ऐलान और संदेश रहे, जिनका असर आम लोगों और देश की नीतियों पर दिखाई दे सकता है?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सितंबर के ‘मन की बात’ कार्यक्रम में देश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बात की। संबोधन में आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति, जनगणना, सांस्कृतिक विरासत, पर्यावरण संरक्षण, नशामुक्ति अभियान, खेल प्रतिभाओं की तलाश, स्थानीय उत्पादों और पोषण जैसे विषय प्रमुख रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत सर्जिकल स्ट्राइक की 10वीं वर्षगांठ के संदर्भ से हुई। प्रधानमंत्री ने कहा कि 28-29 सितंबर 2016 को भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा के पार आतंकी ठिकानों के खिलाफ कार्रवाई की थी। उन्होंने इसे आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति में महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा कि बालाकोट एयर स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक भारत ने आतंकवाद के खिलाफ जवाब देने का संदेश दिया है। उन्होंने दिल्ली के 2008 सीरियल ब्लास्ट और 26/11 मुंबई हमले का भी उल्लेख किया।

इसके बाद प्रधानमंत्री ने जनगणना को राष्ट्रीय दायित्व बताते हुए लोगों से इसमें भाग लेने की अपील की। उनके अनुसार, देशभर में 32 करोड़ से अधिक परिवारों की जानकारी दर्ज की जा चुकी है। उन्होंने मोबाइल के जरिए स्व-गणना की सुविधा का भी उल्लेख किया और बताया कि अब तक 2 करोड़ 60 लाख से ज्यादा लोग पोर्टल के माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज कर चुके हैं।

संबोधन में अशोक सिंहल की जन्म शताब्दी का भी जिक्र हुआ। प्रधानमंत्री ने विश्व हिंदू परिषद के पूर्व अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष को याद करते हुए रामजन्मभूमि आंदोलन और सामाजिक कार्यों में उनकी भूमिका का उल्लेख किया।

प्रधानमंत्री ने सोमनाथ और मोढेरा सूर्य मंदिर की ऐतिहासिक घटनाओं का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने की बात कही। मोढेरा को उन्होंने सौर ऊर्जा और स्थिरता का उदाहरण भी बताया।

स्वच्छता और पर्यावरण पर भी विशेष जोर रहा। मध्य प्रदेश में नदी सफाई, आंध्र प्रदेश में कुओं और बावड़ियों की सफाई तथा मुंबई में समुद्र तटों की सफाई जैसे जनभागीदारी के उदाहरण दिए गए। असम में हाथियों के वापस लौटने और पिग्मी हॉग संरक्षण का भी उल्लेख किया गया। सुंदरबन में मैंग्रोव तैयार कर रही महिलाओं के प्रयासों को भी सामने रखा गया।

युवाओं से जुड़े मुद्दों में ‘नशा मुक्त युवा अभियान’ प्रमुख रहा। प्रधानमंत्री के अनुसार यह अभियान 100 सप्ताह तक चलेगा और इसमें MY Bharat, NSS, शिक्षण संस्थानों तथा सामाजिक और आध्यात्मिक संस्थाओं की भागीदारी होगी।

खेलों में ग्रामीण प्रतिभाओं की तलाश, उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में आंवला आधारित उद्योगों और महिला स्वयं सहायता समूहों, तथा पोषण माह के दौरान विभिन्न राज्यों की पहलों का भी उल्लेख हुआ। प्रतापगढ़ में करीब 100 आंवला प्रोसेसिंग इकाइयों और महिलाओं की भागीदारी को स्थानीय अर्थव्यवस्था के उदाहरण के रूप में रखा गया।

अंत में प्रधानमंत्री ने पोषण, स्थानीय उत्पादों, पर्यावरण और सामाजिक भागीदारी जैसे विषयों को देश के विकास से जोड़ते हुए लोगों से आगामी त्योहारों के दौरान भी सामाजिक जिम्मेदारियों पर ध्यान देने की अपील की।